Balasore Train Accident: बहनगा का वो स्कूल जो शवों से था फुल, Pics देख बच्चों ने स्कूल आने से किया मना
ओडिशा के बालासोर जिले में ट्रेन हादसे के बाद बहनगा हाईस्कूल के कक्ष को शवों को रखने के लिए प्रयोग किया गया। 16 जून से अब ये स्कूल खुल रहा है, लेकिन बच्चे यहां आने से डर रहे हैं।

Balasore Train Accident: ओडिशा के बालासोर जिले में ट्रेन हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने जिस मानवीयता का परिचया दिया उसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम होगी। हालांकि बहनगा रेलवे स्टेशन पर हुआ ट्रेन हादसा सदियों तक नहीं भुलाया जा सकेगा। इस हादसे के बाद नजदीकी विद्यालय बहनगा हाईस्कूल (Bahanaga High School) के हॉल और क्लास रूम को शवों को रखने के लिए प्रयोग किया गया।
हालांकि प्रशासन ने पहले हॉल में ही शव रखवाए थे, लेकिन जब वहां जगह कम पड़ने लगी तो शवों को रखने के दो क्लास रूम का भी प्रयोग किया। वहां से शवों को शिफ्ट करने के बाद स्कूल को साफ सुथरा कर दिया गया, लेकिन अब बच्चे उस मंजर के बाद की स्थिति देख वहां जाने से डर रहे हैं।
बालासोर ट्रेन हादसा हादसे की पीड़ा उन लोगों को सबसे अधिक याद रहेगी जिन्होंने इसे करीब से देखा। हादसे के बाद बहनगा हाईस्कूल में अपने बच्चों को भेजने से अभिभावक कतरा रहे हैं। छात्र और उनके माता पिता डरे हुए हैं। ऐसी स्थिति तब है जब विद्यालय के छात्र छात्राओं ओर उनके अभिभावकों ने ट्रेन हादसे के बाद शवों से पटे पड़े स्कूल की तस्वीरें देखीं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल प्रबंधन समिति ने राज्य सरकार से इस स्कूल के भवन को गिराकर फिर से बनाने की मांग की है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा कि छात्रों और उनके माता-पिता ने जब स्कूल में बड़ी संख्या में शवों को देखने के बाद अब वे वापस स्कूल नहीं आना चाहते।
वहीं बहनागा हाई स्कूल की प्रधानाध्यापिका प्रमिला स्वैन ने इस बात को स्वीकार करते हुए कहा, " कम उम्र के छात्र डरे हुए हैं। स्कूल ने आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित करने और उनके डर पर काबू पाने में मदद करने के लिए कुछ अनुष्ठानों का पालन करने की योजना बनाई है। प्रमिला स्वैन ने कहा कि हादसे के बाद स्कूल के कुछ वरिष्ठ छात्र और एनसीसी कैडेट राहत बचाव कार्य में शामिल हुए थे।
बालासोर के कलेक्टर दत्तात्रेय भाऊसाहेब शिंदे ने कहा, "मैंने स्कूल का दौरा किया। स्कूल का भवन काफी पुराना है। ये कभी भी गिर सकता है। इसके लिए नए भवन का निर्माण किया जा रहा है। फिलहाल छात्र पुराने भवन में अस्थायी रूप से शिफ्ट किए जा रहे हैं, क्योंकि स्कूल 16 जून से खुलने वाले हैं। छात्र पुराने भवन में आने से डर रहे हैं। इस भय को दूर करने के लिए बच्चों और शिक्षकों के काउंसलिंग के लिए टीम भेजी जा रही है।"












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