अयोध्या फैसला: खाली जमीन पर नहीं बनी बाबरी मस्जिद, नष्ट किए गए ढांचे के नीचे था मंदिर
नई दिल्ली। दशकों से लंबित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने फैसला पढ़ना शुरू कर दिया है। बाबरी मस्जिद को लेकर कोर्ट ने कहा है कि बाबरी मस्जिद का निर्माण खाली जगह पर नहीं हुआ था। जमीन के नीचे का ढांचा इस्लामिक नहीं था। ASI के निष्कर्षों में साबित हुआ कि नष्ट किए गए ढांचे के नीचे मंदिर था।

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कोर्ट ने कहा कि पुरातात्विक प्रमाणों को महज एक राय कह देना एएसआई का अपमान होगा। हालांकि, एएसआई ने यह तथ्य स्थापित नहीं किया कि मंदिर को गिराकर मस्जिद बनाई गई। यात्रियों द्वारा लिखी किताबें और प्राचीन ग्रंथ इस बात को दर्शाते हैं कि अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि रही है। ऐतिहासिक उद्धहरणों से भी संकेत मिलते हैं कि हिंदुओं की आस्था में अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि रही है।
कोर्ट ने कहा कि इस बात के प्रमाण हैं कि अंग्रेजों के आने से पहले राम चबूतरा, सीता रसोई की पूजा हिंदुओं द्वारा की जाती थी, इस तथ्य से पता चलता है कि हिंदूओं का विवादित भूमि के बाहरी हिस्से पर कब्जा था। हिंदुओं ने राम चबूतरा पर पूजा करना जारी रखा लेकिन उन्होंने गर्भगृह पर भी स्वामित्व का दावा किया। कोर्ट ने कहा कि हिंदू हमेशा से मानते थे कि भगवान राम का जन्मस्थान आंतरिक प्रांगण में है, ये स्पष्ट रूप से स्थापित है कि मुसलमानों ने आंतरिक आंगन के अंदर नमाज की और हिंदुओं ने बाहरी प्रांगण में पूजा की।












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