आजम खान की सजा पर बड़ी अदालत की मुहर लगी तो क्या होगा, पॉलिटिकल करियर खत्म ?
समाजवादी पार्टी नेता आजम खान कभी अपने बड़बोलेपन के कारण चर्चा में रहते थे, तो अब अपने आपराधिक करतूतों की वजह से सुर्खियों में आते रहते हैं। इस बार उन्हें हेट स्पीच के एक मामले में तीन साल की सजा मिल गई है, जिससे उनकी विधायकी खतरे में पड़ चुकी है। क्योंकि, जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत दो साल की ज्यादा के सजायाफ्ता मुजरिमों की सांसद और विधायक वाली सदस्यता खत्म होने का प्रावधान है। लेकिन, सिर्फ इतना ही नहीं है। कानून यह भी है कि सजा की मियाद पूरी होने के बाद भी वह व्यक्ति अगले 6 वर्षों तक कोई भी चुनाव नहीं लड़ सकता।

मैं इंसाफ का कायल हो गया- आजम खान
रामपुर की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट से तीन साल की सजा सुनाए जाने के बाद समाजवादी पार्टी विधायक आजम खान ने बहुत ही बोल्ड चेहरा दिखाते हुए मीडिया से बात की है। लगता है कि उन्हें उम्मीद है कि ऊपरी अदालत से उन्हें इस मामले में राहत जरूर मिलेगी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, 'ये अधिकतम सजा थी जिसमें जमानत अनिवार्य प्रावधान है, जिस आधार पर जमानत मिली है। लेकिन, मैं इंसाफ का कायल हो गया।' 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के मामले में आजम खान और दो अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन साल की सजा के साथ ही 2000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

आजम खान की विधायकी पर संकट
आजम खान के खिलाफ रामपुर में हेट स्पीच का यह मामला 9 अप्रैल, 2019 को दर्ज किया गया था। उनपर सीएम योगी और वहां के तत्कालीन डीएम आंजनेय कुमार सिंह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए आईपीसी की धारा 153ए और 505-1 समेत जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 125 का भी मामला दर्ज किया गया था। लेकिन, खान को तीन साल की सजा मिलने का अर्थ यह है कि अब वह विधानसभा के सदस्य रहने योग्य नहीं रह जाएंगे।

'अगर सजा की पुष्टि होती है तो विधायकी जानी तय'
रामपुर कोर्ट से तीन साल की सजा सुनाए जाने के बाद आजम खान के पास क्या कानूनी विकल्प रह गए हैं, इसके बारे में वनइंडिया ने एक वरिष्ठ वकील आदित्यनाथ झा से बात की है। उन्होंने कहा है कि 'उनके पास सेशन कोर्ट और हाई कोर्ट में अपील करने का विकल्प है। अगर वहां से इस सजा पर रोक लग जाती है तो फिलहाल उनकी सजा बरकरार रह सकती है। लेकिन, अगर बड़ी अदालत ने भी रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट की सजा की पुष्टि कर दी, तब उनकी विधायकी जानी तय है।'

आजम खान का पॉलिटिकल करियर खत्म ?
लेकिन, यदि ऊपरी अदालतों से अगर आजम खान की सजा बरकरार रह गई तो उनकी मौजूदा विधायकी तो जानी तय है ही, उनका राजनीतिक करियर भी चौपट होना तय है। क्योंकि, 2002 में जनप्रतिनिधित्व कानून में हुए संशोधन के अनुसार वह तीन साल की सजा की अवधि पूरी होने के बाद भी 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। पहले यह अवधि सजा के ऐलान के साथ शुरू होती थी, लेकिन संशोधन के बाद यह सजा पूरी करने के बाद लागू होती है। आजम खान की उम्र अब 74 साल की हो चुकी है। ऐसे में आगे के कानूनी विकल्पों को आजमाने के बाद अगर उन्हें 9 साल गुजारने पड़ गए तो फिर उनके भविष्य के राजनीतिक करियर पर सवाल जरूर खड़ा हो जाता है।

लगभग दो साल जेल में गुजार चुके हैं आजम
सपा नेता आजम इसी साल मई में लगभग दो साल तक जेल में रहने के बाद रिहा हुए हैं। उनके खिलाफ करीब 90 मामले चल रहे हैं। 2012 से 2017 तक जब वे अखिलेश यादव की सरकार में नंबर दो की हैसियत रखते थे तो वह अपनी ठसक की वजह से अलग पहचान बनाए हुए थे। लेकिन, 2017 के बाद जब से राज्य में सरकार बदली है, वह कानूनी मामलों में ऐसे उलझे हैं, जिससे उबर नहीं पा रहे हैं।












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