एमपी में आयुष्मान योजना में गड़बड़ी, जबलपुर और ग्वालियर के दो अस्पताल निलंबित
मध्य प्रदेश राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने थर्ड पार्टी ऑडिट एजेंसी से मिली जानकारी के बाद आयुष्मान भारत निरामय योजना के तहत जबलपुर में लाइफ मेडिसिटी अस्पताल और ग्वालियर में ब्राह्मणी अस्पताल को निलंबित कर दिया है। अनियमितताओं में गलत मरीज वर्गीकरण और अनधिकृत दावे शामिल हैं, जिन पर पहले ही जुर्माना लगाया जा चुका है।
मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत ‘निरामयम्’ योजना के तहत अनियमितताओं और धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। शिकायतों और जांच रिपोर्ट के आधार पर राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने जबलपुर और ग्वालियर के दो अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें योजना से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई थर्ड पार्टी ऑडिट एजेंसी (TPAA) की जांच और पूर्व में प्राप्त शिकायतों के आधार पर की गई है।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध अस्पतालों के क्लेमों की नियमित समीक्षा की जा रही है। इसी दौरान जबलपुर स्थित लाइफ मेडिसिटी हॉस्पिटल के क्लेमों की जांच में गंभीर वित्तीय और प्रक्रियागत अनियमितताएं सामने आईं। जांच में पाया गया कि मरीजों को गलत श्रेणी में भर्ती किया गया, गलत पैकेज लगाए गए और धोखाधड़ी कर आर्थिक लाभ लिया गया।
अस्पताल के खिलाफ पहले भी इसी तरह की अनियमितताओं के चलते 46 लाख 99 हजार 990 रुपये का आर्थिक दंड लगाया जा चुका है। बार-बार चेतावनी के बावजूद अनियमितताएं दोहराए जाने पर जनहित में अस्पताल को आयुष्मान भारत ‘निरामयम्’ योजना से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
इसी तरह ग्वालियर स्थित ब्रह्माणी हॉस्पिटल के क्लेमों की जांच में भी गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। परीक्षण के दौरान पाया गया कि मरीजों को अधिक गंभीर दिखाकर अनावश्यक आर्थिक लाभ लिया गया और क्लेम गलत तरीके से प्रस्तुत किए गए। जांच में धोखाधड़ी के मामले भी सामने आए।
इस अस्पताल के खिलाफ पहले भी कार्रवाई करते हुए 21 लाख 8 हजार 300 रुपये का अर्थदंड लगाया जा चुका है। बार-बार चेतावनी के बावजूद अनियमितताएं जारी रहने पर इसे भी आयुष्मान भारत ‘निरामयम्’ योजना से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
आगे और सख्त कार्रवाई की चेतावनी
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि योजना के पात्र हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की अनियमितता या धोखाधड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एजेंसी के अनुसार दोनों अस्पतालों के खिलाफ आगे की सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें योजना से असंबद्ध करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि दोनों अस्पतालों के पास किसी भी प्रकार का एनएबीएच एक्रेडिटेशन प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं है, जिसे गंभीर अनियमितता माना गया है।
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा है कि आयुष्मान भारत ‘निरामयम्’ योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी सूचीबद्ध अस्पतालों की लगातार निगरानी की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।












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