Ayodhya News: कौन हैं सूर्यवंशी क्षत्रियों के पुरोहित देवीदीन पांडेय, जिन्होंने 700 मुगल सैनिकों को दी मौत
Ram Mandir Ayodhya News: अयोध्या लंबे समय से आस्था का केंद्र रही है। लेकिन मुगल आक्रमण के बाद यहां की तस्वीर को बदलने और आस्था पर चोट पहुंचाने की पूरी कोशिश की गई। इस दौरान कई मठ- मंदिरों के महंतों, पुजारियों ने अपने आराध्य के विग्रह को बचाने के लिए सरयू नदी में उसे डालना बेहतर समझा। ऐसे में सनातन धर्म पर मुगलों के प्रहार को रोकने ने एक पुरोहित ने मोर्चा संभाला।
अयोध्या में मुगल सेना से भिड़ने वाले वीर योद्धा का नाम देवीदीन पांडेय का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वे रामनगरी के सनेथू गांव के जन्मे थे। अकेले दम पर मीर बांकी की सेना के उन्होंने छक्के छुड़ा दिए। पांडेय ने अकेले 700 मुगल सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था। बाबर ने अपनी आत्मकथा लिखा है, "अकेले देवीदीन ने सात सौ मुगल सैनिकों को मार डाला...।"

मीर बांकी की सेना से भिड़ने वाले अयोध्या के देवीदीन पांडेय सूर्यवंशी क्षत्रियों के पुरोहित थे। वे मलखंभ, कुश्ती के अलावा शास्त्र के साथ ही शस्त्र चलाने के भी शौकीन थे। मीर बांकी की सेना से भिड़ने वाले अयोध्या के देवीदीन पांडेय सूर्यवंशी क्षत्रियों के पुरोहित थे। वे मलखंभ, कुश्ती के अलावा शास्त्र के साथ ही शस्त्र चलाने के भी शौकीन थे। उनकी विद्वत्ता और वीरता की चर्चा दूर-दूर तक होती थी। देवीदीन पांडेय कर्मकांडी ब्राम्हण परिवार से शामिल थे।
जलालशाह के कारनामे से उबल पड़ा था खून
अयोध्या के इतिहास का जब भी जिक्र आता है तो देवीदीन पांडेय का नाम एक योद्धा के रूप में लिया जाता है। बाराबंकी गजेटियर में हैमिल्टन लिखते हैं, "जलालशाह ने हिंदुओं के खून का गारा बनाकर लखौरी ईटों से मस्जिद तामीर करने को दी..."। इस दौरान राम जन्मभूमि पर मंदिर टूटने की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। सूर्यवंशी क्षत्रियों के पुरोहित रहे देवीदीन पाण्डेय ने जब इसे सुना तो उनका खून खौल उठा। मुगलों के हिंदू मंदिरों और सनातन धर्म पर आक्रमण से रक्षा के लिए उन्होंने पुरोहित कर्म के तरफ रखा और क्षत्रियों को तहत ढाल बनने के लिए अकेले मुगल सेना से मोर्चा लेने के सामने आए। देवीदीन पाण्डेय ने ग्रामीणों के साथ मिलकर सेना बनाई और मीर बांकी की सेना का सामना करने निकल पड़े।
सूर्यवंशी क्षत्रियों ने भी दिया था साथ
इतिहासकारों के मुताबिक जब पुरोहित देवीदीन पांडेय ने तलवार उठाई तो क्षत्रियों ने भी उनका साथ दिया। मुगल सेना से लोहा लेने के लिए बड़ी संख्या में सूर्यवंशी भी बाबर के वजीर मीर बांकी ताशकंदी की सेना को चारों ओर से घेर लिया। महादेव के नारों के साथ मुगल सेना पर सभी टूट पड़े। यहां जमकर खून बहा।












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