Ayodhya Verdict: VHP ने 1990 से जारी पत्थरों को तराशने का काम किया बंद, बताई ये वजह

नई दिल्ली: अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पूरे देश की नजरें टिकी है। 17 नवंबर से पहले इस पर फैसला आने की पूरी उम्मीद है। इसकी वजह सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का इसी दिन रिटायर्ड होना है। वहीं दूसरी तरफ विश्व हिंदू परिषद(वीएचपी) ने फैसला आने से पहले ही राम मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों को तराशने का काम बंद कर दिया है। साल 1990 के बाद से ये पहली बार है जब पत्थर तराशने का काम रोका गया है।

वीएचपी ने लिया बड़ा फैसला

वीएचपी ने लिया बड़ा फैसला

वीएचपी के प्रवक्ता शरद शर्मा ने बताया कि इस काम में लगे सभी कारीगर अपने घर वापस लौट गए हैं। उन्होंने कहा कि विहिप के नेताओं ने पत्थरों को तराशने का काम बंद करने का फैसला लिया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 40 दिन तक इस मामले की सुनवाई की। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने इस मामले में सुनवाई की थी।

'राम जन्मभूमि न्यास तय करेगा'

'राम जन्मभूमि न्यास तय करेगा'

शरद शर्मा ने कहा कि हमने पत्थरों को तराशना रोक दिया है और अब राम जन्मभूमि न्यास ही तय करेगा कि इन्हें तराशने का काम दोबारा कब शुरू किया जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि अयोध्या पर आने वाले फैसले को ध्यान में रखते हुए हमारे संगठन की विभिन्न गतिविधियों से जुड़े हमारे सभी प्रस्तावित कार्यक्रम भी रद्द कर दिए गए हैं

1990 से चल रहा है काम

1990 से चल रहा है काम

गौरतलब है कि साल वीएचपी ने साल 1990 में राम मंदिर निर्माण कार्यशाला में राम मंदिर के भव्य निर्माण के लिए पत्थरों को तलाशने का काम शुरू किया था। तब समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। तब से वहां कारीगर निर्बाध तरीके से ये काम कर रहे हैं। वीएचपी के मुताबिक 1.25 लाख घन फुट पत्थर पहले ही तराशा जा चुका है।

'पहली मंजिल के लिए पर्याप्त पत्थर'

'पहली मंजिल के लिए पर्याप्त पत्थर'

वीएचपी का दावा है कि प्रस्तावित मंदिर की पहली मंजिल के निर्माण के लिए पर्याप्त पत्थर तराशा जा चुका है, जबकि शेष ढांचे के लिए 1.75 लाख घन फुट पत्थर अभी भी तराशा जाना है। विहिप ने अयोध्या मामले पर फैसला आने से पहले अपने कार्यकर्ताओं से शांति बरतने और उन्मादी जश्न का माहौल बनाने से बचने की अपील की है।

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