Ayodhya Ram Mandir: राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से चारों शंकराचार्यों ने क्यों बनाई दूरी? बताई बड़ी वजह

Ayodhya Ram Mandir Inauguration: श्री राम जन्मभूमि प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले दो बड़ी बहस छिड़ गई है। ये दोनों श्री राम जन्मभूमि में होने वाले अनुष्ठान को लेकर मंदिर ट्रस्ट की ओर से भेजे गए निमंत्रण को लेकर ही हैं। पहला मुद्दा अनुष्ठान को लेकर ही है, जिसे चारों शंकराचार्यों ने छेड़ा है। दरअसल, शंकराचार्यों ने कहा है कि मंदिर का निर्माण पूरा हुए बिना प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान शास्त्रों के अनुसार उचित नहीं है। स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा है कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान में शास्त्रीय विधि का पालन नहीं हो रहा है। वहीं कांग्रेस समेत अन्य कई दलों के नेताओं ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में आने से इनकार कर दिया है।

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि को लेकर एक लंबी लड़ाई के बाद रामलला को एक स्थाई मंदिर में स्थापित किया जाएगा। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के लिए 22 जनवरी को श्री राम जन्मभूमि परिसर में हो रहे अनुष्ठान में शामिल होने पीएम मोदी अयोध्या आ रहे हैं। इस दौरान अयोध्या में एक उत्सव जैसा माहौल है।

Ram Mandir Inauguration Shankaracharyas distance

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के साथ शासन, प्रशासन और की स्वायत्त संस्थानों ने खास प्रबंध किए हैं। राम जन्मभूमि परिसर में होने वाले अनुष्ठान में शामिल होने के मंदिर ट्रस्ट ने देश की कई हस्तियों, प्रमुख नेताओं, साधु संतों, महंतों समेत कई सम्मानित लोगों आमंत्रित किया है। लेकिन ट्रस्ट के इस आमंत्रण के साथ ही ट्रस्ट और केंद्र सरकार पर कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं और चारों शंकराचार्यों ने बड़े आरोप लगाए हैं।

दरअसल, चार में से दो शंकराचार्यों ने तो अयोध्या के अनुष्ठान में शामिल होने साफ इनकार कर दिया है। पूर्वाम्नाय जगन्नाथ पुरी के गोवर्धन पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती और उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने साफ कहा है कि वे श्री राम जन्मभूमि परिसर में होने वाले अनुष्ठान में शामिल होने से इनकार कर दिया है। जहां शास्त्रीय विधि का पालन नहीं हो वहां हमारा रहने का कोई औचित्य नहीं है। क्योंकि शास्त्र कहते हैं कि विधि पूर्वक प्राण प्रतिष्ठा न हो उस प्रतिमा में देव विग्रह की बजाय भूत, प्रेत, पिशाच, बेताल आदि हावी हो जाते हैं।

शंकराचार्यों क्यों किया इनकार?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा है कि राम मंदिर का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में अपूर्ण मंदिर में भगवान की प्राण प्रतिष्ठा शास्त्रों अनुसार उचित नहीं है। वहीं पश्चिमाम्नाय द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती का भी प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान में शामिल नहीं हो रहे हैं। हालांकि उन्होंने इस पर मुखर होकर स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा है।

स्वामी भारती तीर्थ ने क्या कहा?
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर स्वामी भारती तीर्थ की ओर से मठ ने पत्र जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि स्वामी प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान के विरोध में नहीं हैं। कुछ धर्म द्वेषी लोग ऐसा दुष्प्रचार कर रहे हैं कि मैं प्राणप्रतिष्ठा समारोह के विरोध में है। ललेकिन ये सच नहीं है। लेकिन पत्र में स्वामी भारती तीर्थ के अयोध्या जाने का जिक्र नहीं है। मठ के सू्त्रों के मुताबिक ये कहा जा रहा है कि स्वामी जी 22 जनवरी को अपने मठ में ही रहेंगे।

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