Ayodhya Land Disputes: मंदिर के पक्ष में आया फैसला तो क्या मान जाएंगे मुस्लिम?
बंगलुरू। अयोध्या लैंड डिस्प्यूट मामले में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ का फैसला मंदिर के पक्ष में आएगा अथवा मस्जिद के पक्ष में होगा, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर फैसला राम मंदिर के पक्ष में गया तो क्या देश का मुस्लिम इसे सहज रूप से स्वीकार कर लेगा?
यह सवाल मौजू इसलिए भी हैं, क्योंकि बाबरी मस्जिद विध्वंश के 25 वर्ष बाद भी मुस्लिम वर्ग समझौते को लेकर कभी सहज नहीं दिखा है। उसे इस बात का डर भी है कि अगर अयोध्या में मंदिर बन गया तो काशी और मथुरा में भी यह मांग उठनी शुरू हो जाएगी। यही कारण है कि मुस्लिम समुदाय असमंजस में हैं।

उल्लेखनीय है राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद भूमि विवाद के समाधान के लिए गठित मध्यस्थता फेल होने के बाद मामले के अतिशीघ्र निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित संवैधानिक पीठ गत 6 अगस्त से लगातार सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट मामले के जल्द निपटारे के लिए हफ्ते में 5 दिन सुनवाई कर रही है और अगर इसी गति से सुनवाई होती रही तो संभावना है कि ट्रायल जल्द पूरा जाएगा और नवंबर माह तक फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला आ सकता है।
राम मंदिर और बाबरी मस्जिद को लेकर मुस्लिम समुदायों का कहना है कि विवाद का निपटारा समझौते से ही संभव है। उनका मानना है कि समझौता सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले हो अथवा बाद में हो, लेकिन इस मसले को एक विवेकपूर्व समझौते से ही खत्म किया जा सकता है।

लखनऊ स्थित इस्लामिया नदवा सेमिनारी में मौलाना सलमान नदवी का कहना है कि वो बाबरी मस्जिद को विवादित स्थल से इतर जगह पर शिफ्ट करने के पक्ष में हैं। उदारण देते हुए उन्होंने बताया कि दूसरे खलीफा उमर बिन खत्ताब ने 584 एडी से 644 एडी के बीच मार्केट निर्माण के लिए एक मस्जिद को उसकी जगह से हटाकर कूफा ( इराक) यानी दूसरी जगह शिफ्ट करवा दिया था।
बताते हैं कि मौलाना सलमान नदवी को उनके उक्त बयान के चलते ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ से तुरंत बाहर कर दिया गया। मालूम हो, भारत में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ विभिन्न मुस्लिम समुदायों की एक औपचारिक और प्रभावशाली निकाय है।
गौरतलब है मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा तबका कोर्ट की कार्रवाई को टकटकी लगाकर देख रहा है और कोर्ट के फैसले के बारे में सोच रहा है। उन्हें डर है कि कोर्ट के फैसला अगर राम जन्मभूमि के पक्ष में आया और अयोध्या में मंदिर निर्माण हो गया तो दक्षिणपंथी मथुरा और काशी समेत अन्य जगहों के लिए कोर्ट पहुंच जाएंगे।
हालांकि मुस्लिमों का डर स्वाभाविक भी है, क्योंकि एक आंकड़े के मुताबिक भारत में 3000 ऐसे मस्जिदों को सूचीबद्ध किया गया है, जिन्हें पहले मंदिर होने का दावा किया या है।
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