Ayodhya dispute: बाबर के वंशज ने मांगी माफी, रामराज्य रथ यात्रा शुरू पर कही बड़ी बात
नई दिल्ली। मंगलवार को अयोध्या से राम मंदिर रथयात्रा शुरू की गई। मंगलवार को ही मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी हुई। इस मामले को लेकर मुगल बादशाह बाबर के वंशज बताए जाने वाले प्रिंस याकूब हबीबुब्दीन तुसी ने कहा है कि वो राम मंदिर के पक्ष में हैं और इसके लिए अपनी ओर से हर संभव कोशिश भी करेंगे। याकूब ने कहा कि मुगल बादशाहों ने जो गलतियां की हैं, उनके लिए वह माफी मांगते हैं और राम मंदिर के लिए अपना समर्थन देते हैं।

विहिप की मदद से शुरू हुई यात्रा
विश्व हिंदू परिषद के समर्थन से अयोध्या से मंगलवार को 'राम राज्य रथयात्रा' शुरू की गई है। यह यात्रा तमिलनाडु के रामेश्वरम में समाप्त होगी और इससे पहले अगले दो महीनों में छह राज्यों से गुजरेगी। यात्रा के दौरान इसके समर्थन में 10 लाख से अधिक लोगों का हस्ताक्षर भी कराया जाएगा। विश्व हिंदू परिषद और महाराष्ट्र की संस्था श्री रामदास मिशन यूनिवर्सल सोसायटी के सहयोग से यह रथयात्रा निकाली जा रही है।

विहिप सिर्फ यात्रा के समर्थन में, हिस्सा नहीं
हालांकि विश्व हिंदू परिषद अवध जोन के समन्वयक शरद शर्मा ने बताया कि वीएचपी रथ यात्रा को सपॉर्ट कर रही है लेकिन उसका हिस्सा नहीं है। यहां तक कि विश्व हिंदू परिषद का बैनर भी रथ यात्रा के साथ नहीं होगा। यात्रा का समापन राम नवमी (25 मार्च) को होगा। इस दौरान केंद्र सरकार से प्राथमिकता के तौर पर 14 महीने के अंदर राम मंदिर बनाए जाने की मांग की भी जाएगी

मिनी ट्रक को बनाया गया है 'रथ'
राम राज्य रथयात्रा में एक रथ होगा। एक टाटा मिनी ट्रक को रथ का स्वरूप दिया गया है। 25 लाख रुपये से बने इस रथ को 4 महीने में बनाया गया है। लकड़ी से बने इस रथ में दक्षिण भारतीय मसालों का प्लास्टर लगाया गया है। इसमें 28 घुमावदार पिलर्स बनाए गए हैं। आयोजकों का कहना है कि रथ की जो आकृति है वह प्रस्तावित राम मंदिर की तरह है। यह यात्रा भाजपा शासित उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र के अलावा कांग्रेस शासित कर्नाटक से गुजरेगी।












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