Ayodhya Dispute: ''99 प्रतिशत मुसलमान चाहते हैं,भगवान राम का मंदिर अयोध्या में बने"
बेंगलुरु। सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या रामजन्मभूमि विवाद में लगातार सुनवाई चल रही है उम्मीद जतायी जा रही है नवंबर माह तक सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना देगी। इसी बीच हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों ने मध्यस्थता से मसले के हल करने की कवायद फिर से शुरु कर दी हैं। इसी दिशा में मंगलवार को आल इंडिया मुस्लिम फोरम के प्रतिनिधियों का समूह अयोध्या पहुंच गया। फोरम में प्रतिनिधियों ने रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास के अध्यक्ष महंत जनमेजयशरण के आश्रम जानकीघाट बड़ास्थान पहुंचकर मध्यस्थता का प्रयास शुरु किया।

जिसमें सबसे रोचक बात यह रही कि संतों के सम्मुख अपना एजेंडा पेश करते हुए फोरम के सदस्य आफताब अहमद ने कहा कि अयोध्या विवाद का सद्भावपूर्ण हल निकलना चाहिए। भगवान राम भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए पूज्यनीय हैं। इतना हीं नहीं उन्होंने कहा कि भगवान राम का मंदिर अयोध्या में बने। यह हम ही नहीं 99 फीसद मुस्लिम भी चाहते हैं। हमें उन लोगों से बचना होगा जो निजी लाभ के लिए हिन्दू -मुस्लिमों को लड़ा रहे हैं।
बता दें सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या रामजन्मभूमि विवाद पिछले 30 दिनों से लगातार सुनवाई चल रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 18 अक्टूबर तक केस की सुनवाई के लिए अंतिम समयसीमा निर्धारिक तक सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की पांच सदस्सीय संवैधानिक पीठ नवंबर माह में इस केस का फाइनल ऐतिहासिक फैसला सुना देगी। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई से मध्यस्थता पैनल को मध्यस्थता से हल करने के प्रयासों को जारी रखने का आदेश दिया था। इसलिए यह मामला मध्यस्थता से हल हो इसकी उम्मीदें भी बरकरार हैं।

न्यायमूर्ति गोगोई ने पिछले सप्ताह दोनों पक्षों द्वारा इस मामले में मध्यस्थता शुरु करने की इच्छा जाहिर करने के बाद कहा था कि अयोध्या मामले की सुनवाई मध्यस्थता के प्रयासों के लिए रोकी नहीं जायेगी। अयोध्या मामले की सुनवाई के साथ-साथ इसके समाधान के लिए समानांतर रुप से मध्यस्थता के प्रयास जारी रखे जा सकते हैं। पीठ ने कहा कि इस मामले में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं सी एस वैद्यनाथ और राजीव धवन की तरफ से सुनवाई पूरी करने के लिए दिये गये अनुमानित समय के मद्देनजर इस वर्ष 18 अक्टूबर तक सुनवाई खत्म हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्यस्थता के जरिये इस मामले के समाधान के लिए संबंधित पक्षों पर किसी प्रकार की रोक नहीं है। इस मामले के सभी पक्ष बातचीत के जरिये इस विवाद का समाधान कर सकते हैं और उसका नतीजा पीठ के सामने रख सकते हैं। जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता शुरु हुई।
मध्यसमुस्लिम फोरम के प्रतिनिधि मंडल में लखनऊ निवासी अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता अमीर हैदर, प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री मुईद अहमद, कस्टम विभाग के सेवानिवृत्त आयुक्त तारिक गौरी, सेवानिवृत्त न्यायाधीश बीडी नकवी, सामजिक कार्यकर्ता वहीद सिद्दीकी एवं सीआरपीएफ के पूर्व आइजी आफताब अहमद खां सहित इस मुहिम के समन्वयक उत्तम शर्मा शामिल हैं। मंगलवार को फोरम के यह सभी सदस्य मध्यस्थता से मामले को हल करने के प्रयास में अयोध्या पहुंचे।

मुस्लिम फोरम के चार सूत्री सुझाव हैं। जिसमें विवादित स्थल मंदिर के लिए छोडऩे की बात कही गई है। अयोध्या में किसी मुनासिब जगह पर मुसलमानों को 10 एकड़ जमीन देने, धार्मिक स्थलों की यथास्थिति कायम रखने तथा 1991 में बने द प्लेसेज ऑफ वर्शिप को पूर्णत: लागू करने की बात कही गई है।
इसी दौरान संतों के सम्मुख अपना एजेंडा पेश करते हुए सीआरपीएफ के पूर्व आइजी आफताब अहमद खां ने कहा कि अयोध्या विवाद का सद्भावपूर्ण हल निकलना चाहिए। भगवान राम भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए पूज्यनीय हैं। भगवान राम का मंदिर अयोध्या में बने। यह हम ही नहीं 99 फीसद मुस्लिम भी चाहते हैं। हमें उन लोगों से बचना होगा जो निजी लाभ के लिए हिन्दू -मुस्लिमों को लड़ा रहे हैं। हमें उन लोगों से बचना होगा जो निजी लाभ के लिए हिंदुओं-मुस्लिमों को लड़ा रहे हैं।
वहीं फोरम के सदस्य कस्टम विभाग के सेवानिवृत्त आयुक्त तारिक ने कहा, राममंदिर अवश्य बने और वहीं बने। मैं स्वयं कारसेवा में आऊंगा पर मुल्क के वास्ते आगे ऐसे मुद्दे न छेड़े जाएं। पूर्व मंत्री मुईद अहमद ने कहा, हम मुहब्बत के भूखे हैं। सुप्रीम कोर्ट यदि मस्जिद के हक में फैसला करता है, वहां राममंदिर का निर्माण चाहेंगे। महंत जनमेजयशरण सहित इस मौके पर मौजूद रामजन्मभूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्रदास, निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्रदास, अखाड़ा के अधिवक्ता रणजीतलाल वर्मा, नागा रामलखनदास आदि ने भी मुस्लिम फोरम के प्रतिनिधियों के रुख का स्वागत किया।












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