Audhesh Prasad: वो दलित नेता, झेला इमर्जेंसी का दौर, जेल में कटी रातें, अयोध्या में कैसे तोड़ा 'BJP का क्रेज'?
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान एनडीए का मुकाबला करने के लिए गठित अलायंस आईएनडीआईए ने काफी हद तक सफलता हासिल की है। हालांकि गठबंधन में शामिल सभी 26 दलों की सीटें मिलाकर भी ये गठबंधन जादुई आंकड़े 272 से दूर रह गई। लेकिन इंडी गठबंधन के कुछ प्रत्याशियों ने कई सीटों पर एनडीए कैंडिडेट्स को कड़ी फाइट दी। इसको लेकर बीजेपी या फिर एनडीए अलायंस में शामिल दल ही नहीं, राजनीतिक विश्लेषक भी हैरान हैं। 9 बार विधायक और अखिलेश सरकार में मंत्री रह चुके अवधेश प्रसाद (Audhesh Prasad) की अयोध्या सीट पर जीत कुछ ऐसी ही है।
लोकसभा चुनाव 2024 में अयोध्या में सपा दिग्गज की जीत की बड़ी वजह बीजेपी कैंडिडेट को लेकर वोटर्स में नाराजगी बताई जा रही है, जो कि अयोध्या के कुछ स्थानीय को लेकर है। लेकिन एक सच ये भी है कि अयोध्या में अवधेश प्रसाद का अपना अलग दबदबा है।

अखिलेश प्रसाद सपा के पूर्व सुप्रीमो स्व. मुलायम सिंह के शिष्य माने जाते हैं। विधानसभा में उनकी सीट को देखकर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनका पार्टी (सपा) में क्या स्थान है। दरअसल, सदन के भीतर अवधेश प्रसाद की सीट समाजवादी पार्टी प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ठीक बगल होती है।
मुलायम सिंह थे राजनीतिक गुरु
बात अवधेश प्रसाद राजनीतिक करियर जब- जब होती है, तो नाम उनकी पार्टी का ही आता है। मुलायम सिंह उनके राजनीतिक गुरु है। प्रसाद समाजवादी पार्टी की स्थापना से ही जुड़े रहे अवधेश प्रसाद दलित समाज से आते हैं। अवधेश प्रसाद की गिनती विधानसभा में वरिष्ठ सदस्य के रूप में जाना जाता है। मुलायम सिंह के निधन के बाद अवधेश प्रसाद पार्टी के वरिष्ठतम नेताओं में से हैं।
दलित, पिछड़े वोट बैंक पर पकड़
माना जाता है कि सपा की ओर पीएडीए मुद्दे को लाने में अवधेश प्रसाद का भी बड़ा रोल है। जिसका उन्होंने लोकसभा चुनाव में बड़े स्तर पर प्रयोग किया। हालांकि कई सीटों पर सपा इसका फायदा नहीं मिला, लेकिन अयोध्या में पीडीए फैक्टर पूरी तरह काम कर गया। अयोध्या में अवधेश प्रसाद का दलित वोट बैंक पर खासी पकड़ होने के साथ-साथ यादव और मुस्लिम मतदाताओं का समीकरण भी सपा दिग्गज के फेवर में ही रहता है।












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