पूर्वोत्तर राज्यों मेघालय और नगालैंड में क्या है विधानसभा चुनाव का गणित
भारत में पूर्वोत्तर के तीन राज्य त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय इस महीने विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया से गुज़र रहे हैं.
इन तीनों राज्यों में 60 सदस्यीय विधानसभाएं हैं. जहां त्रिपुरा में मतदान इस महीने की 16 तारीख़ को संपन्न हो चुका है, वहीं नगालैंड और मेघालय में 27 फ़रवरी को वोट डाले जा रहे हैं.
कहां किसकी सरकार
तीनों राज्यों में बीजेपी या तो सत्ता में है या सरकार को समर्थन दे रही है. मेघालय में एनडीए की सरकार है.
साल 2018 में बीजेपी ने नेशनल पीपुल्स पार्टी के साथ मिलकर सरकार चलाने की पेशकश की थी. वहीं नगालैंड में नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी बीजेपी के साथ मिलकर सरकार चला रही है.
नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी एनडीए का हिस्सा है. वहीं त्रिपुरा में बीजेपी की सरकार है.
त्रिपुरा
माणिक साहा अभी त्रिपुरा के मुख्यमंत्री हैं. राज्य में कुल 60 विधानसभा सीटे हैं. 2018 के चुनाव में एनडीए ने बहुमत की रेखा को पांच सीटों से पार करते हुए 36 सीटें जीती थीं.
जबकि सीपीआई (एम) सिर्फ़ 16 सीटों पर सिमट गई थी. कांग्रेस को इस चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली थी.
2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में एक तरफ़ भाजपा ने सत्ता में दोबारा वापसी के लिए पूरा ज़ोर लगाया है, वहीं दूसरी तरफ़ राज्य में विपरीत विचारधारा की वाम मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन के साथ चुनाव मैदान में हैं.
पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस भी त्रिपुरा चुनाव में मैदान में है.
पश्चिम बंगाल के कई मंत्रियों ने त्रिपुरा का ख़ूब दौरा किया. लेकिन जानकारों का मानना है कि पहले के चुनावों की तरह तृणमूल कांग्रेस इस बार भी कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर सकेगी.
वाम मोर्चा 43 और कांग्रेस 13 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. जबकि गठबंधन ने एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन दिया है.
त्रिपुरा में कुल मतदाताओं की संख्या 28,13,478 है. इसमें महिला मतदाताओं की संख्या 13,98,825 है.
नगालैंड
नगालैंड में नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी की सरकार है. ये पार्टी 2017 में चुनाव से पहले तत्कालीन सत्ताधारी नगा पीपुल्स फ़्रंट से अलग हो कर बनी थी.
साल 2018 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने एनडीए से गठजोड़ कर चुनाव जीता था. एनडीए को 2018 के चुनाव में 32 सीटें मिली थीं. जबकि नगा पीपुल्स फ़्रंट को 27 सीटें मिल पाई थीं. नेफ़ियू रियो अभी नगालैंड के मुख्यमंत्री हैं.
इस बार के चुनाव में सीट बंटवारे में एनडीपीपी को 40 सीटें मिली हैं और बीजेपी 20 सीटों पर चुनाव लड़ रही है.
इस बार नगालैंड विधानसभा चुनाव में कुल 1317632 वोटर मतदान देने के योग्य हैं. इसमें 661489 पुरुष और 656143 महिला वोटर शामिल हैं.
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मेघालय
मेघालय की 60 सीटों वाली विधानसभा के लिए 27 फ़रवरी को मतदान हो रहा है. मतगणना 2 मार्च को की जाएगी.
इस राज्य में जहां कांग्रेस अपना वजूद बचाने के लिए मैदान में है, वहीं बीजेपी डबल इंजन की सरकार के फ़ॉर्मूले को लेकर अकेले चुनाव लड़ रही है.
वहीं जनता के सामने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस भी एक विकल्प के तौर पर है. दूसरी तरफ़ नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) जैसे क्षेत्रीय राजनीतिक दल सत्ता में शामिल होने की जद्दोजहद में हैं.
यहां नेशनल पीपुल्स पार्टी के कॉनराड संगमा सीएम हैं.
साल 2018 के चुनाव में कांग्रेस को 59 में 21 सीटों पर जीत मिली थी. जबकि नेशनल पीपुल्स पार्टी 20 सीटें जीत पाई थी. बीजेपी सिर्फ़ 2 सीटें जीत पाई थी. चुनाव के बाद बीजेपी से गठजोड़ कर नेशनल पीपुल्स पार्टी ने सरकार बनाई थी.
नेशनल पीपुल्स पार्टी, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी, पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ़्रंट, हिल स्टेट पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी जैसी कई पार्टियां ज़मीन पर सक्रिय नज़र आती हैं.
2018 के मेघालय विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 28.5 प्रतिशत वोट मिले थे. जबकि नेशनल पीपुल्स पार्टी को 20.6 प्रतिशत वोट मिले थे.
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जीत के लिए पार्टियों की रणनीति
त्रिपुरा में एक भाषण के दौरान बीजेपी नेता और देश के गृह मंत्री अमित शाह ने अपने एक भाषण में अयोध्या में बन रहे राम मंदिर को 1 जनवरी, 2024 को खोले जाने का एलान किया था.
जिसके बाद से जानकारों ने इस ओर ध्यान खींचा कि बीजेपी आने वाले चुनावों में 'मंदिर और राष्ट्रवाद' की रणनीति के तहत चुनाव लड़ेगी.
हालांकि बीजेपी ने घोषणापत्र में कई वादे किए. बीजेपी ने कहा कि सत्ता में वापस लौटने पर आदिवासी क्षेत्रों के लिए विधायी, कार्यकारी और वित्तीय शक्तियों में स्वायत्तता दी जाएगी.
त्रिपुरा में बीजेपी के प्रतिद्वंद्वी वाम दल ने बीजेपी पर धर्म की राजनीति करने का आरोप लगाया है.
त्रिपुरा में कांग्रेस रोज़गार, बिजली और पुरानी पेंशन योजना जैसे मुद्दों से वोटरों को साधती नज़र आई.
वहीं मेघालय में कांग्रेस ने राज्य को बेरोज़गारी और भष्टाचार मुक्त करने का भी वादा किया है.
राज्य में 36 विधानसभा सीटों पर पुरुषों के मुक़ाबले महिला आबादी ज़्यादा है. इसलिए राजनीतिक पार्टियां महिलाओं के मुद्दों को भी साधने की कोशिश करती दिखीं.
नगालैंड में बीजेपी 'एम्पावर नगालैंड' के नारे के साथ नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के साथ लड़ रही है.
वहीं कांग्रेस ने नगालैंड में वादा किया कि सरकार बनने के बाद वो राज्य में शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण देगी और प्रति माह 3,000 रुपये वृद्धावस्था पेंशन भी देगी.
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