असम पुलिस ने 'किसान' को डकैत समझकर मारी गोली, जांच में खुलासे के बाद हंगामा
Assam News:असम के धनसिरखुटी गांव में हुई गोलीबारी में डकैत होने के संदेह में एक किसान को गोली मार दी गई। सीआईडी जांच में इस बात का खुलासा हुआ है।

Assam: असम के उदलगुरी जिले में एक पुलिस मुठभेड़ में डकैत होने के संदेह में एक व्यक्ति की मौत की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि यह गलत पहचान का मामला था। दरअसल, पुलिस ने जिसे डकैत समझकर गोली मारी थी वह कोई डकैत नहीं बल्कि एक किसान था।
सीआईडी ने की जांच
सीआईडी की जांच में यह निष्कर्ष निकला कि गोलीबारी में मारा गया व्यक्ति डकैत केनाराम बोरो(Kenaram Boro) नहीं था, बल्कि डिंबेश्वर मुचाहारी (Dimbeswar Muchahary) नाम का किसान था। मृतक के परिवार ने भी किसान होने का दावा किया हालांकि पुलिस ने कहा कि यह किसानी जरूर करता था लेकिन अपराधी किस्म का व्यक्ति था।
किसान और डकैत के परिवार ने ठोका था दावा
मृत व्यक्ति के शरीर को शुरू में डकैत बोरो की मां को सौंप दिया गया था, क्योंकि उसने उसे अपने बेटे के रूप में पहचाना था। लेकिन अंतिम संस्कार के बाद मुचाहारी के परिवार ने दावा किया कि यह उनका बेटा है। फिर मामला बिगड़ने के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सीआईडी जांच का आदेश दिया, जो 2 मार्च से शुरू हुई। पुलिस ने कहा कि इसके बाद शव को बाहर निकाला गया, डीएनए विश्लेषण किया गया और यह पाया गया कि शव किसान मुचाहारी का ही था न कि बोरो का। पुलिस ने दावा किया कि 24 फरवरी को रौता इलाके के धनसिरिखुटी गांव में हुई गोलीबारी में दो पुलिसकर्मी भी घायल हो गए थे।
कौन है डकैत केनाराम
डकैत केनाराम बोरो प्रतिबंधित संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड का एक पूर्व सदस्य,असम और मेघालय में सशस्त्र डकैतियों के कई मामलों में वांछित है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि उसे पहले भी कई मौकों पर आग्नेयास्त्रों के साथ गिरफ्तार किया गया था।
मुचाहरी उर्फ गोबला भी कठोर अपराधी
पुलिस के मुताबिक मुचाहरी उर्फ गोबला भी एक "कठोर अपराधी" था और उसे पहले आग्नेयास्त्रों के साथ गिरफ्तार किया गया था। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि दोनों को एक मामले में फरार दिखाया गया था।












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