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Lok Sabha Polls: कहां गया 'जादुई उपचार' और 'मुबारक पानी', बदरुद्दीन अजमल क्यों नहीं कर रहे प्रचार में इस्तेमाल

Assam Lok Sabha Chunav 2024: इत्र कारोबारी और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के अध्यक्ष मौलाना बदरुद्दीन अजमल एक बार फिर से असम की धुबरी लोकसभा सीट से चुनावी किस्मत आजमा रहे हैं। लेकिन, इस चुनाव में उनका अंदाज काफी बदला-बदला नजर आ रहा है।

एआईयूडीएफ चीफ अब 'जादुई उपचार' के लिए 'मुबारक पानी' का इस्तेमाल करते नजर नहीं आते। जबकि, चुनाव प्रचार के दौरान 'मुबारक पानी' का इस्तेमाल करना उनका ट्रेडमार्क बन गया था।

badruddin ajmal

कहां गया 'जादुई उपचार' और 'मुबारक पानी'?
एक समय था जब वह रैलियों में दुआ के बाद अपने अनुयायियों की ओर से लाए गए कई कंटेनर पानी आशीर्वाद के तौर पर भी छिड़क देते थे। क्योंकि, उनके अनुयायियों को लगता है कि इसका करामाती असर होता है। कई बार इस 'मुबारक पानी' के लिए धक्का-मुक्की की स्थिति भी पैदा हो जाती थी।

अजमल के समर्थकों का कहना है कि उनके 'मुबारक पानी' से उनकी बीमारियां ठीक होती हैं, लेकिन विरोधियों का दावा था कि वह सिर्फ चुनाव जीतने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाते रहे हैं।

असम सरकार ने 'जादुई उपचार' का कर दिया है इलाज!
दरअसल, इसी साल फरवरी में असम विधानसभा से असम हीलिंग (प्रिवेंशन ऑफ एविल) प्रैक्टिसेज बिल, 2024 पास किया गया है। इसका मकसद गलत इरादे से किए जाने वाले अवैज्ञानिक उपचार पद्धतियों को मिटाना है।

इस कानून के तहत जो भी व्यक्ति इलाज या जादुई उपचार के नाम पर गैर-कानूनी कार्य करने का दोषी पाया जाता है, उसे कारावास की सजा मिलेगी और जुर्माना भी देना होगा।

इस कानून के मुताबिक कोई भी व्यक्ति किसी भी बीमारी, विकार या किसी इंसान की सेहत (मानव शरीर से संबंधित) से संबंधित इलाज के नाम पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गलत धारणा से जादुई उपचार और प्रचार में हिस्सा नहीं लेगा।

तीन साल तक की सजा और जुर्माने का इंतजाम
इस कानून के अनुसार इस तरह का कार्य संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है, जिसमें एक साल की सजा का प्रावधान है, जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है और 50 हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों ही लगाया जा सकता है।

फरवरी में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा था कि अजमल जो 'मुबारक पानी' छिड़कते हैं, वह इस कानून के तहत प्रतिबंधित नहीं है। लेकिन, यह कानून चुनावों के दौरान इस तरह के कार्यों पर रोक लगाता है।

'जादुई पानी' की वजह से भीड़ खींचते रहे हैं अजमल
अजमल यूपी के देवबंद के मौलवी रहे हैं और वह भीड़ खींचने में माहिर मानते जाते हैं। माना जाता है कि उनके 'जादुई पानी' के चलते ही उनके पास इतनी भीड़ जुट जाती है। लेकिन, इसकी वजह से वह विवादों में भी आते रहे हैं।

परफ्यूम किंग का कारोबार विदेशों में भी फैला है
परफ्यूम किंग के नाम से असम से लेकर खाड़ी देशों तक में चर्चित बदरुद्दीन अजमल लगभग 6 दशकों से इत्र के कारोबार से जुड़े हैं। इत्र के अलावा उनका बिजनेस चमड़ा उद्योग और चाय उत्पादन से लेकर रियल एस्टेट तक में भी भारत से लेकर दूसरे देशों तक में भी फैला हुआ है।

धुबरी सीट से 2009 से ही जीत रहे हैं अजमल
धुबरी लोकसभा सीट पर अजमल 2009 से ही चुनाव जीत रहे हैं। यहां उनके मुकाबले में बीजेपी की सहयोगी असम गण परिषद की ओर से जाबेद इस्लाम चुनाव मैदान में हैं और कांग्रेस ने पूर्व मंत्री रकिबुल हुसैन को उतारा है। यहां इस बार मुख्य रूप से त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है।

यूं तो धुबरी में मुसलमान बहुसंख्यक हैं, लेकिन देशी मुसलमान और बंगाली बोलने वाले प्रवासी मुसलमानों के बीच एक पतली रेखा पैदा हुई है। धुबरी लोकसभा सीट के तहत 11 विधानसभा क्षेत्र आते हैं।

धुबरी सीट पर 7 मई को चुनाव होगा, जिसमें 26,63,987 मतदाता हिस्सा लेंगे। इनमें 13,64,490 पुरुष और 13,14,537 महिला वोटर हैं। 26 मतदाता थर्ड जेंडर के रूप में भी रजिस्टर्ड हैं।

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