असम में अब नहीं चलेगा काजी, UCC से पहले हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा फैसला

एक तरफ जहां केंद्र सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड लाने की तैयारी कर रही है तो दूसरी तरफ असम सरकार इससे पहले ही मुस्लिम शादियों और तलाक को लेकर नया कानून लाने जा रही है। प्रदेश सरकार आज से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में इस अहम विधेयक को पेश करने जा रही है।

यह विधेयक सरकार द्वारा मुस्लिम समुदाय में विवाह और तलाक के पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है। रिपोर्ट के अनुसार, गुवाहाटी के लोक सेवा भवन में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में प्रदेश सरकार की मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान इस निर्णय को अंतिम रूप दिया गया।

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निकाह में पारदर्शिता

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस कानून के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि असम में मुसलमानों के बीच वैवाहिक और तलाक के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए यह बिल काफी कारगर साबित होगा।

बाल विवाह पर लगेगी रोक

मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पहले मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण काज़ी द्वारा किया जाता था। यह नया विधेयक यह सुनिश्चित करेगा कि मुस्लिम विवाह पंजीकरण काज़ी द्वारा नहीं, बल्कि सरकार द्वारा किया जाएगा। 18 वर्ष से कम आयु में विवाह पंजीकरण नहीं होगा। पंजीकरण प्राधिकरण असम सरकार का उप रजिस्ट्रार होगा।

पंजीकरण अनिवार्य

इस नए विधेयक का मुख्य उद्देश्य बाल विवाह से निपटना है। साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि सभी विवाह सरकार के पास पंजीकृत हों। इस बिल के जरिए असम में मुस्लिम समुदाय के भीतर विवाह और तलाक को संभालने के तरीके पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

पुरानी बिल्डिंग को लेकर बड़ा फैसला

इसके साथ ही मुख्यमंत्री सरमा ने विरासत संरचनाओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से एक और महत्वपूर्ण उपाय की घोषणा की। उन्होंने कहा कि मंदिर या नामघर जैसी किसी भी विरासत संरचना के आसपास का 5 किलोमीटर का दायरा जो कम से कम 250 साल पुराना है, उसे संरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाएगा। इसका मतलब है कि इस दायरे में भूमि का लेन-देन केवल उन परिवारों के बीच हो सकता है जो तीन पीढ़ियों या उससे अधिक समय से वहां रह रहे हैं।

विश्वविद्यालय खोलने के लिए सुरक्षा मंजूरी जरूरी

साथ ही मुख्यमंत्री सरमा ने असम में विश्वविद्यालय खोलने के लिए अनिवार्य सुरक्षा मंजूरी की आवश्यकता वाले एक नए कानून की योजना की जानकारी दी है। सरमा ने कहा कि केरल के कुछ संस्थान असम के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में विश्वविद्यालय खोलने के इच्छुक हैं।

कांग्रेस की नीति थी कि किसी भी अमीर संस्थान को आसानी से विश्वविद्यालय खोलने की अनुमति दी जाए। राज्य मंत्रिमंडल में एक नया अधिनियम आएगा, जिसके तहत नर्सिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज और डेंटल कॉलेज खोलने के लिए सुरक्षा मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।

सरमा ने बताया कि केरल के कुछ विश्वविद्यालय बराक घाटी और बारपेटा में उचित पृष्ठभूमि जांच के बिना खुद को स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन असम में जांच का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए हम सुरक्षा मंजूरी का प्रावधान लाएंगे।

इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल विश्वसनीय संस्थान ही असम में शैक्षणिक सुविधाएं स्थापित कर सकें, जिससे राज्य में शिक्षा और सुरक्षा के उच्च मानक कायम रहें।

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