Assam chunav से पहले कांग्रेस की 'ऐसी तैसी' करके BJP में शामिल हुए भूपेन बोरा, क्या 50 करोड़ लेकर किया ये डील?
Assam chunav 2026 (Bhupen Borah BJP Join) : असम की राजनीति में चुनाव से पहले बड़ा उलटफेर हुआ है। 32 साल तक कांग्रेस में सक्रिय रहे भूपेन बोरा ने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है। असम भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया और भाजपा सांसद बैजयंत पांडा की मौजूदगी में 22 फरवरी को उन्होंने सदस्यता ली।
इससे एक दिन पहले 21 फरवरी को उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ( Amit Shah) से मुलाकात की थी। इस बैठक में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) भी मौजूद थे।

'राहुल ने कहा, वो भी अपमानित हैं'
इस्तीफे के बाद भूपेन बोरा ने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उन्हें फोन किया था। बोरा का कहना है कि उन्होंने राहुल से कहा कि वह पार्टी में खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं। इस पर राहुल ने जवाब दिया कि उन्हें भी अपमानित महसूस होता है। बोरा ने सवाल उठाया कि अगर ऐसा है तो उनके अपमान की कीमत क्या है? उन्होंने साफ कहा कि वह इतना अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते।
भूपेन बोरा बोले- 32 साल कांग्रेस में रहा लेकिनपिता का सपना अधूरा रह गया
भूपेन बोरा ने भावुक होकर अपने पिता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता का सपना एक स्टेडियम बनाने का था और इसके लिए 12 बीघा जमीन भी अलग रखी थी। दो बार विधायक रहने के बावजूद वह यह सपना पूरा नहीं कर सके। 2019 में उनके पिता का निधन हो गया। बोरा ने कहा कि 50 करोड़ रुपये से अत्याधुनिक स्टेडियम नहीं बन पाएगा, लेकिन अगर कोई यह रकम देगा तो वह मीडिया के सामने स्वीकार करेंगे और काम शुरू करेंगे।
क्या 50 करोड़ लेकर भाजपा में शामिल हुए भूपेन बोरा?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने आरोप लगाया था कि भूपेन बोरा ने भाजपा में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से 50 करोड़ रुपये लिए हैं। इस पर भूपेन बोरा ने कहा कि अगर उन्हें पैसे की पेशकश होगी तो वह खुलेआम स्वीकार करेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी गठबंधन को कमजोर करने में पार्टी नेतृत्व की भूमिका रही।
भूपेन बोरा ने कहा,
"प्रियंका गांधी के असम दौरे की जानकारी के मुताबिक 9 तारीख को एक बैठक हुई थी। उसमें कहा गया कि जल्द से जल्द गठबंधन बनाना है और इतने कम समय में यह काम सिर्फ भूपेन बोरा ही कर सकते हैं। योजना यह थी कि जब प्रियंका गांधी यहां पहुंचेंगी तो सभी सहयोगी दल एक साथ हाथ उठाकर गठबंधन का ऐलान कर देंगे। इस जिम्मेदारी को लेने के लिए मैं भी तैयार और खुश था। गठबंधन अब भी होगा। गौरव गोगोई ने गठबंधन इसलिए तोड़ा क्योंकि अगर गठबंधन की सरकार बनती तो वह मुख्यमंत्री नहीं बन पाते। उन्हें लगा कि गठबंधन जारी रहा तो उनके राजनीतिक अस्तित्व पर खतरा आ सकता है। असम कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, जो पार्टी की रीढ़ माने जाते हैं, उनका अपमान हुआ है। अब बाकी बचे नेताओं को मनाने की कोशिश की जाएगी।"
भूपेन बोरा कौन हैं? 32 साल की राजनीति और नया अध्याय
भूपेन बोरा 2021 से असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे और तीन दशक से ज्यादा समय तक पार्टी से जुड़े रहे। उनका कहना है कि यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन जनता की सेवा के लिए उन्होंने नया रास्ता चुना है। उन्होंने दावा किया कि आत्मसम्मान और राष्ट्रवादी सोच रखने वाले कांग्रेस के कई नेता जल्द भाजपा में आ सकते हैं।
असम की 126 सीटों वाली विधानसभा के चुनाव मार्च अप्रैल में संभावित हैं। ऐसे समय में बोरा का भाजपा में जाना सत्तारूढ़ दल के लिए बड़ा मनोबल माना जा रहा है। चुनावी मौसम में यह कदम असम की सियासत में नई हलचल लेकर आया है।












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