जम्मू-कश्मीर से ज्यादा असम में आतंकी हमलों में मारे गये लोग
नई दिल्ली। भारत में आतंकवाद पर चर्चा हो तो हर किसी के ज़हन में जम्मू-कश्मीर का नाम आता है। हर कोई कहता है, उफ पता नहीं घाटी के हालात कब सुधरेंगे, लेकिन सच तो यह है कि असम में हात घाटी से कहीं ज्यादा बदतर हैं। जी हां यहां पर आतंकी हमलों में मरने वालों की संख्या कश्मीर की तुलना में ज्यादा है।

हाल ही में असम में 85 आदिवासी लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। इसे विडंबना ही कहेंगे कि पेशावर के स्कूल में आतंकी हमले पर भारत के लगभग सभी टीवी चैनलों ने दिन भर आंसू बहाये और आतंकवादियों के प्रति दांत पीस-पीस कर अपनी भड़ास जाहिर की। लेकिन असम में हमला हुआ तो एक-दो चैनलों को छोड़ सब पर डेरा सच्चा सौदा के राम रहीम की आने वाली फिल्म के प्रोमोशनल इंटरव्यू चलते दिखाई दिये। जिन आंकड़ों को हम आपके सामने रखने जा रहे हैं, अगर उन आंकड़ों पर चैनलों का ध्यान गया होता, तो शायद तस्वीर उलट होती।
सबसे महत्वपूर्ण- पिछले 2 वर्षों में असम में आतंकी हमलों में 423 लोग मारे गये, जबकि जम्मू-कश्मीर में 378 लोग। वहीं छत्तीसगढ़ में पिछले दो साल में नक्सली वारदातों में 254 लोग मारे गये।
अन्य तथ्य जो हिला कर रख देंगे आपको
- सुरक्षा विशेषज्ञों की रिपोर्ट में असम को संवेदनशील राज्य घोषित किया गया है।
- भारतीय सेना ने असम में कार्रवाई तेज कर दी है, बहुत जल्द पलटवार भी हो सकते हैं।
- उलफा और एनएफडीबी (एस) के साथ बातचीत के तामाम प्रयास विफल रहे हैं।
- रोहिंग्या मुसलमानों और बौद्धों के प्रति टसल रखने वाले जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा ने म्यानमार और बांग्लादेश में अपने बेस बनाये हैं। अगर ये बेस सक्रिय हुए तो असम पर खतरा बढ़ जायेगा।
- रोहिंग्या मुसलमान पहले ही भारत में दाखिल होने लगे हैं। इसका ताजा उदाहरण हैदराबाद में सामने आया था। इनका बर्दवान धमाके में भी कनेक्शन है।
सुझाव जो सुरक्षा विशेषज्ञों ने भारत सरकार को दिये
- असम को भी उतनी ही गंभीरता से ले, जितनी गंभीरता से वो घाटी को लेती है।
- बांग्लादेश और म्यानमार से सटी असम में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को सील करने की जरूरत है।
- रिपोर्ट में कहा गया है कि असम में आने वाले दिनों में तेजी से हिंसा बढ़ सकती है, लिहाजा सतर्क रहें।












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