कोरोना की वजह से 2903 रेलवे कर्मचारियों ने गंवाई जान, राज्यसभा में रेल मंत्री ने दी जानकारी
नई दिल्ली, 24 जुलाई: पिछले साल फरवरी में देश में कोरोना महामारी फैली, जिस वजह से मार्च में सरकार ने देशव्यापी लॉकडाउन लागू कर दिया। उस दौरान सभी अपनी जान बचाने के लिए घरों में कैद रहे, लेकिन रेलवे जनता की सेवा में जुटा रहा। साथ ही मुश्किल हालात के बावजूद लोगों और जरूरी सामानों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया। हालांकि इस दौरान बड़ी संख्या में रेलवे कर्मचारी कोरोना से संक्रमित हुए, जिसमें 2,903 ने अपनी जान गंवाई।

राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न का जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पिछले साल आई महामारी की वजह से 2903 कर्मचारियों की मौत हुई। जिसमें से 2782 कर्मियों के परिवारों को बकाया भुगतान कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे की नीति है कि ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले या सेवा में रहते हुए मरने वाले कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति दी जाती है। इसी नियम के तहत कोविड-19 से जान गंवाने वाले कर्मचारियों के आश्रितों को भी कवर किया जा रहा है।
रेल मंत्री के मुताबिक उनके अधिकारी इस मामले में गंभीर हैं, जिस वजह से अब तक 1732 मामलों में अनुकंपा नियुक्ति प्रदान कर दी गई है, बाकी जो मामले बचे हैं उनका भी जल्द निपटारा कर दिया जाएगा। उन्होंने सदन को सूचित किया कि अब तक 8,63,868 रेलवे कर्मचारियों को टीके की पहली खुराक दी जा चुकी है, जबकि 2,34,184 कर्मचारी ऐसे हैं, जिन्होंने दोनों खुराक ले ली है। रेलवे ने टीकाकरण के लिए अपने यहां पर्याप्त केंद्र स्थापित कर रखे हैं। वैष्णव ने कहा कि वैक्सीन की उपलब्धता के आधार पर रेलवे कर्मचारियों को जल्द से जल्द टीका लगाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।












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