'मलेरिया की दवा बना नहीं सकते, चले हैं भारत से पंगा लेने', ओवैसी ने पाकिस्तान की औकात बताई
Owaisi Criticises Pakistan: भारत-पाक रिश्तों में जब भी तल्खी आती है, असदुद्दीन ओवैसी अपनी दो टूक और तीखी बातों से हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। इस बार भी उन्होंने ऐसा ही किया। हाल ही में एक जनसभा में AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) प्रमुख ओवैसी ने पाकिस्तान को जमकर लताड़ा। पाकिस्तान को सीधा-सीधा जवाब देते हुए उन्होंने कहा, 'तुम एक मलेरिया की गोली नहीं बना सकते, मोटर साइकिल का टायर तक नहीं बना सकते और भारत से पंगा लेने चले हो!'
ओवैसी ने पाकिस्तान को लताड़ते हुए कहा, 'शुक्र है, हमारे बुजुर्ग पाकिस्तान नहीं गए वरना आज हमें इन पागलों को बर्दाश्त करना पड़ता। पाकिस्तान को चीन के पास गिरवी रख दिया और अब इस्लाम की दुहाई देते हो!' उनकी इस तीखी टिप्पणी पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी।

पुरानी यादें भी की ताजा
गौरतलब है कि ओवैसी खुद 2012 में एक भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ पाकिस्तान गए थे। उस वक्त उन्होंने वहां के नेताओं से मिलकर भारत-पाक रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश की थी। लेकिन, आज जब पाकिस्तान आतंक का अड्डा बनता जा रहा है, ओवैसी के तेवर भी सख्त हो गए हैं।
CAA पर इमरान को लगाई थी फटकार
जनवरी 2020 में जब पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने CAA पर भारत की आलोचना करते हुए एक फर्जी वीडियो शेयर किया था, तब भी ओवैसी ने उन्हें करारा जवाब दिया था - 'मिस्टर खान, हमें कभी याद मत कीजिए। हमने जिन्ना के सिद्धांत को खारिज कर दिया है। हम गर्वित भारतीय मुसलमान हैं, और हमेशा रहेंगे।'
प्रमोद कृष्णम ने की तारीफ
ओवैसी के बयान पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा,'राहुल गांधी और अखिलेश यादव से अच्छा बयान तो ओवैसी का है। वो हिंदुओं के खिलाफ हो सकते हैं, लेकिन हिंदुस्तान के साथ हैं।' प्रमोद कृष्णम ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ नेता पाकिस्तान का समर्थन खुलेआम करते हैं और कुछ छुपकर।
क्या है सियासी संदेश?
ओवैसी का यह बयान सिर्फ पाकिस्तान के लिए नहीं, बल्कि देश की राजनीति के लिए भी एक बड़ा संदेश है। उन्होंने दिखा दिया कि जब बात देश की हो, तो धर्म और विचारधारा से ऊपर उठकर एक भारतीय के तौर पर बोलना चाहिए।
ओवैसी का यह अंदाज़ बताता है कि वो किसी भी मौके पर पाकिस्तान को उसकी औकात दिखाने से पीछे नहीं हटते। उनकी ये बातें उस वर्ग को भी जवाब हैं जो बार-बार भारतीय मुसलमानों की वफादारी पर सवाल खड़े करता है।












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