CAA की बात इस अंदाज में करने के पीछे असदुद्दीन ओवैसी की मंशा क्या?
नई दिल्ली, 23 नवंबर: प्रधानमंभी नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया था। इन कानूनों को लेकर एक साल से किसान बहुत जोदरार प्रदर्शन कर रहे थे। सरकार के इस ऐलान के बाद कश्मीर को खास दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 और सीएए एनआरसी जैसे विवादित मामलों में भी सरकार से कदम वापस लेने की मांग कुछ लोगों ने की है। इनमें सबसे प्रमुख नाम असदुद्दीन ओवैसी का है लेकिन उनकी जो बात ध्यान खींचने वाली है, वो है उनका अंदाज।

क्या कह रहे हैं ओवैसी
कृषि कानूनों की वापसी के ऐलान के बाद जमीयत उलेमा हिन्द की ओर से कहा गया कि पीएम अब सीएए कानूनों को भी वापस लेने पर विचार करें। उनकी ओर से एक सधे अंदाज में ये अपील पीएम से की गई। इसके बाद इसमें कूदे ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) अध्यक्ष और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी। इसमें कोई मसला नहीं है कि ओवैसी या कोई सीएए की वापसी के लिए कह रहा है। इसकी वापसी की मांग तो लगातार होती ही रही है लेकिन ओवैसी के तौर-तरीकों से लगता है कि वो सिर्फ उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में सियासी फायदे के लिए ये कर रहे हैं।

इस 'धमकीभरे अंदाज' से क्या होगा
असदुद्दीन ओवैसी ने हाल के दिनों में लगातार सीएए का जिक्र किया है। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी अपनी जनसभा में उन्होंने जिस तरह से उन्होंने सीएए के आने पर सड़कों पर उतरने और शाहीन बाग खड़ा करने की बात धमकीभरे अंदाज में की। वो इस कानून की मुखालफत करने वााले कई लोगों को भी खटकी है। उसकी सबसे बड़ी वजह तो ये है कि सीएए के खिलाफ दिल्ली का शाहीन बाग आंदोलन के नेता असदुद्दीन ओवैसी नहीं थे। वो वहीं लोकल के लोगों का आंदोलन था, जिसे नागरिक समाज समेत कई वर्गों से समर्थन मिला। इसमें सिख और हिन्दू भी लगातार साथ में शामिल रहे। अब ओवैसी की भाषा और फिर उनके जवाब में जिस तरह से बीजेपी के कई नेताओं के बयान आए हैं, उनसे तो यही लगता है कि ये ठंडे बस्ते में पड़े सीएए के बहाने यूपी चुनाव में एक सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश है।

कहीं दाल ना गलते देख ओवैसी इस ओर आए!
उत्तर प्रदेश में अगले साल मार्च-अप्रैल में होने वाले चुनाव को लेकर सबसे पहले सक्रिय होने वाले नेताओं में असदुद्दीन ओवैसी का नाम है। ओवैसी ने ओम प्रकाश राजभर के राष्ट्रीय भागीदारी संकल्प मोर्चा का ऐलान काफी पहले कर दिया था। बाद में राजभर ने ओवैसी से नाता तोड़ अब समाजवादी पार्टी से गठबंधन कर लिया। सपा और बसपा से गठजोड़ की कोशिश भी उनकी ओर से हुई लेकिन वो कामयाब नहीं हुए। वहीं मुस्लिमों से भी बहुत ज्यादा समर्थन उनको मिलता नहीं दिखा। ऐसे में कहा जा रहा है कि सीएए के बहाने वो माहौल को बदल मुस्लिमों के एक वर्ग में पैठ जमाना चाहते हैं।












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