Arvind Kejriwal: किसानों से क्यों मुंह फेरने लगी 'आप', दिल्ली से पंजाब तक कितना बदल गया अंदाज? 5 संकेत

Arvind Kejriwal News: 2022 में पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की ऐतिहासिक जीत में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के संघर्ष को 'आप' का भरपूर समर्थन मिला था, जिसका उसे जबरदस्त सियासी लाभ भी हुआ। लेकिन हाल के दिनों में उसी 'आप'की सरकार पर किसानों के आंदोलन को दबाने के आरोप लग रहे हैं।

सवाल यह है कि आखिर आम आदमी पार्टी और किसानों के रिश्तों में यह बदलाव क्यों आया?

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आइए, इसे पांच प्रमुख संकेतों के आधार पर समझने की कोशिश करते हैं:

Arvind Kejriwal: पंजाब के किसान नेताओं के खिलाफ सख्ती

पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार ने 5 मार्च के'चंडीगढ़ चलो' मार्च से पहले कई किसान नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। भारतीय किसान यूनियन (उग्राहन) के प्रमुख जोगिंदर सिंह उग्राहन सहित कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया और 24 घंटे से अधिक समय तक बंदी बनाकर रखा।

किसान नेताओं का कहना है कि यह कार्रवाई उन्हें दबाने और उनके आंदोलन को कमजोर करने के लिए की गई। यह वही 'आप' है, जिसने दिल्ली में किसानों के विरोध प्रदर्शनों का खुलकर समर्थन किया था, लेकिन अब दिल्ली की सत्ता जाने के बाद उसकी नीति बदल गई है।

Arvind Kejriwal AAP: मुख्यमंत्री भगवंत मान का किसानों से संवाद के तरीके पर विवाद

जब भगवंत मान विपक्ष में थे, तब उन्होंने खुद किसान आंदोलनों में भाग लिया था,लेकिन अब उनका रवैया बदल चुका है। किसान नेताओं के अनुसार, पहले की सरकारें (कांग्रेस और बीजेपी-अकाली दल) भी विरोध दबाने के लिए कदम उठाती थीं, लेकिन 'आप'सरकार ने इस मामले में ज्यादा सख्ती दिखाई है।

भगवंत मान पर आरोप है कि वे किसानों के साथ बैठक बीच में ही छोड़कर चले गए, जो किसी भी मुख्यमंत्री के लिए बहुत ही अटपटा कदम माना जा रहा है। यही वजह है कि पंजाब के किसान नेताओं को लगता है कि सत्ता में आने के बाद उनके नजरिए में परिवर्तन आया है।

क्योंकि, दिल्ली की सीमाओं पर जब किसान रास्ता रोके बैठे थे, तो तब दिल्ली के मुख्यमंत्री रहते हुए अरविंद केजरीवाल खुद उनके समर्थन के लिए पहुंच गए थे।

Arvind Kejriwal News: धरना से निकली आम आदमी पार्टी अब किसानों के विरोध को ही कुचलने लगी- किसान नेता

पंजाब के सबसे बड़े किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन (उग्राहां) के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उग्राहां ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी खुद एक आंदोलन से निकली थी और उसने धरना-प्रदर्शन की राजनीति को अपनी पहचान बनाया था।

दिल्ली में AAP सरकार ने किसान आंदोलन का पूरा समर्थन किया, लेकिन पंजाब सरकार की रणनीति बदल गई है। अब वही 'आप'सरकार किसानों के विरोध को दबाने के लिए पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल कर रही है। इससे यह साफ दिखता है कि अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी की सत्ता में आने के बाद राजनीति और रणनीति दोनों बदल गई है।

Arvind Kejriwal AAP: बीजेपी की राह पर चलने का लगने लगा आरोप

किसान नेताओं का आरोप है कि पंजाब के सीएम भगवंत मान अब वही भाषा बोल रहे हैं, जो केंद्र सरकार और बीजेपी बोलती थी। वे ग्रामीण और शहरी आबादी के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं और किसानों की मांगों को दरकिनार कर रहे हैं।

किसान संगठनों का मानना है कि छोटे उद्योगपतियों और व्यापारियों को भी सरकार की नीतियों से नुकसान हो रहा है;और वे शहरी आबादी को इस मुद्दे पर साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं।

Arvind Kejriwal: आप सरकार के बदले रवैए के बाद किसान संगठनों ने भी बदली रणनीति

'चंडीगढ़ चलो'मार्च रद्द होने के बाद किसान संगठनों ने 'आप' विधायकों के घरों के बाहर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया। आगे चलकर होली के बाद 15 मार्च को चंडीगढ़ में किसान भवन में बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे। इससे साफ है कि किसानों ने अब पंजाब सरकार को घेरने की योजना बना ली है और यह विवाद आगे भी जारी रह सकता है।

इसे भी पढ़ें- 'केजरीवाल न तो राज्यसभा जा रहे..ना ही पंजाब के CM बन रहे', काफिले पर भी प्रियंका कक्कड़ ने दी सफाई

ऐसे में आने वाले दिनों में सियासी तौर पर पंजाब की स्थिति दिलचस्प रहने वाली है, जहां की सरकार अबतक खुलकर आंदोलनों और धरना-प्रदर्शनों को बढ़ावा देती आ रही थी, लेकिन अचानक उसने यू-टर्न लेकर उन्हें हर हाल में रोकने की ठान रखी है।

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