मोदी की ढाई लोगों की सरकार, अखिलेश राज में थे साढ़े तीन मुख्यमंत्री

ब बीजेपी ने यूपी की अखिलेश सरकार पर साढ़े तीन मुख्यमंत्री होने के आरोप लगाए थे और जमकर प्रचार किया था। जिसके बाद अखिलेश यादव चुनाव में गए और उन्हें मुंह की खानी पड़ी

नई दिल्ली। अरुण शौरी ने केंद्र की बीजेपी सरकार को ढाई लोगों की सरकार कहकर आलोचना की है। इससे पहले यूपी में सपा सरकार में अखिलेश राज के दौरान साढ़े तीन मुख्यमंत्री कहा जाता था। वरिष्ठ अर्थशास्त्री और अटल सरकार में मंत्री रहे अरुण शौरी ने आर्थिक मुद्दों पर मोदी सरकार को जमकर घेरा है। अरुण शौरी ने कहा है कि केंद्र में ढाई लोगों की सरकार है और वो ढ़ाई लोग ही सारे फैसले लेते हैं वो किसी एक्सपर्ट की नहीं सुनते हैं। शौरी के मुताबिक इन ढाई लोगों की सरकार ने देश को बहुत पीछे धकेल दिया है। इसी तरह के आरोप बीजेपी यूपी सरकार पर तब लगाती थी जब सूबें में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री। अरुण शौरी के आरोपों के बाद केंद्र सरकार के मैनेजर्स इसका काट ढूंढ़ने में लगे हैं।

'मोदी सरकार को ढाई लोग चला रहे हैं'

'मोदी सरकार को ढाई लोग चला रहे हैं'

शौरी ने कहा कि सरकार और पार्टी में व्याप्त तानाशाही के कारण सरकार आर्थिक मुद्दों पर पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र में ढाई लोगों की सरकार है, जो विशेषज्ञों की नहीं सुनती और अपने मन से नीतियां बनाती है। इससे पहले जब उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी तब बीजेपी ये कहा करती थी कि यूपी में साढ़े तीन लोगों की सरकार चल रही है। अब उसी तरह का प्रहार बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने अपनी ही सरकार पर किया है जिसको लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। अरुण शौरी का ढाई लोगों से तात्पर्य पीएम मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और वित्त मंत्री अरुण जेटली से है।

अखिलेश को तो जनता ने नकार दिया था

अखिलेश को तो जनता ने नकार दिया था

अब सवाल ये उठ रहा है कि जब बीजेपी ने यूपी की अखिलेश सरकार पर साढ़े तीन मुख्यमंत्री होने के आरोप लगाए थे और जमकर प्रचार किया था। जिसके बाद अखिलेश यादव चुनाव में गए और उन्हें मुंह की खानी पड़ी। लेकिन यहां मामला तो बिल्कुल उलट है केंद्र सरकार पर तो बीजेपी के बड़े नेता ने सवाल उठाए है और केंद्र में बीजेपी की ही सरकार है। तो 2019 में क्या होगा। आपको बता दें कि अखिलेश सरकार में साढ़े तीन मुख्यमंत्री कहने का तात्पर्य मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव, आजम खान और अखिलेश यादव से हुआ करता था।

 क्या नोटबंदी एक घोटाला था?

क्या नोटबंदी एक घोटाला था?

शौरी ने नोटबंदी को विश्व का सबसे बड़ा मनी लॉन्ड्रिंग घोटाला बताते हुए कहा कि इसके तहत बड़े पैमाने पर काले धन को सफेद किया गया। उन्होनें कहा कि आरबीआई खुद इसका प्रमाण देती है जिसके एक रिपोर्ट के तहत नोटबंदी के दौरान 99 फीसदी पुराने नोट बैंकों में जमा किए गए। शौरी ने कहा कि नोटबंदी के तहत काले धन को बैंको में जमाकर सफेद कर दिया गया। सरकार का दावा था कि इससे भ्रष्टाचार, टैक्स चोरी, काले धन में कमी आएगी लेकिन ऐसा कुछ भी ना होते दिख रहा है। इसके बजाय देश आर्थिक संकट से गुजर रही है।

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