अरुण जेटली ने इस चुनाव को मोदी बनाम अराजकता बताया
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं की बयानबाजी शुरू हो गई है। तमाम दल चुनाव में अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी चुनाव के ऐलान के बाद ट्वीट करके कहा है कि इस बार का चुनाव अराजकता या मोदी के बीच है। जेटली ने फेसबुक पर पोस्ट करके चुनाव के ऐलान के बाद विस्तार से अपनी बात रखी है। उन्होंने लिखा है कि अगले दस हफ्तों में विचारधाराओं के बीच टकराव देखने को मिलेगा। यह टकराव विचारधाराओं, प्रतिस्पर्धात्मक होगा, जो नेतृत्व के लिए उम्मीदवारों के बीच होगा। आज मैं इस चुनाव में सबसे बड़े मुद्दे को लेकर बात कर रहा हूं वह है नेतृत्व की।

मोदी बनाम अराजकता
जेटली ने कहा कि महागठबंधन खुद ही अपने आप में ही विध्वंसकारी है, यह गठबंधन विरोधियों का गठबंधन है, ऐसे में यह चुनाव मोदी बनाम अराजकता के बीच है। पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए एक बार फिर से लोगों से दूसरा मौका दिए जाने की अपील करेगा। 900 मिलियन लोगों से अपील की जाएगी कि और उनसे अपेक्षा है कि वह 11 अप्रैल से होने वाले मतदान में हमे एक बार फिर से सेवा का मौका दें। वोटों की मतगणना 23 मई को होगी।

खुद में विध्वंसकारी गठबंधन
तमाम भाजपा विरोधी दल कांग्रेस, सपा, बसपा और टीएमसी एकजुट हो गए हैं और उन्होंने मोदी की अगुवाई वाली एनडीए के खिलाफ महागठबंधन किया है। यह गठबंधन खुद में ही विध्वंसकारी है, यह गठबंधन अपने आप में अलग-अलग विचारों का गठबंधन है। जेटली ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि विपक्ष में नेतृत्व अभी भी सबसे बड़ी पहेली है। राहुल गांधी अक्षम नेता हैं। उन्हें मौका दिया गया और वह फेल हुए हैं, उन्हें मुद्दों की समझ नहीं है और वह विध्वंसकारी गुट का नेता बनना चाहते हैं।

विपक्ष का गठबंधन कमजोर
वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि विपक्ष का गठबंधन साफ नही है और वह बेहद ही कमजोर है। किसी भी पार्टी में क्षमता नहीं है कि वह अच्छी संख्या में सीटें ला पाए। यह गठबंधन अति महत्वाकांक्षी, खुद में सीमित नेताओं का गठबंधन है। कांग्रेस और लेफ्ट को छोड़ दें तो सभी दलों ने किसी ना किसी समय में भाजपा के साथ राजनीतिक धंधेबाजी की है। इन लोगों की विचारधारा और इनके मतदाताओं के बीच किए गए वादे बिल्कुल अलग हैं।












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