अरुण जेटली को राजनीति में कौन लेकर आया, उनके एक दोस्त ने बताया
नई दिल्ली- अरुण जेटली के राजनीति में आने का किस्सा बेहद दिलचस्प है। उनके 49 साल पुराने साथी ने इस बेहद भावुक पलों का खुलासा किया है। हरीश गुप्ता नाम के जेटली के एक पत्रकार मित्र ने बताया है कि उनकी प्रतिभा को देखकर कांग्रेसी भी छात्र राजनीति के जमाने से उन्हें अपनी पार्टी में शामिल कराने के लिए उतावले थे। लेकिन, बाजी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने मारी थी।

'आरएसएस में नहीं थे, लेकिन उसके रंग में रंग गए'
बीजेपी के दिवंगत नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के 49 साल पुराने पत्रकार दोस्त हरीश गुप्ता ने बताया है कि हर समस्या का समाधान देने की उनमें ऐसी खूबी थी, जैसा किसी दूसरे नेता में देखने को नहीं मिलता। उन्होंने जेटली के आरएसएस से संबंधों के बारे में बताया है कि 'वे आरएसएस में नहीं थे, लेकिन उन्हें आरएसएस ने अपनाया और वे आरएसएस के रंग में ऐसे रंग गए कि आरएसएस ही उनका जीवन हो गया। मतलब आरएसएस को लगता था कि ये हमारा अपना है।' उनके मुताबिक बीजेपी में नेता में बहुत हुए हैं, लेकिन हर क्षेत्र को जानने वाला ऐसा नेता नहीं हुआ। जेटली के वरिष्ठ पत्रकार मित्र ने ये भी जानकारी दी है कि उनके दिल में अरमान था कि आने वाले नवंबर में वे अपने बेटे रोहन की शादी करेंगे, लेकिन उससे पहले ही वे दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से बीमारी के कारण सबको छोड़कर चले गए।
राजकुमार भाटिया एबीवीपी में लेकर आए
जेटली के डिबेटिंग अवॉर्ड जीतने की पहली फोटो छापने वाले उनके मित्र ने एक चैनल को दिए इंटरव्यू में बताया है कि शुरू में उनके टैलेंट को देखकर कांग्रेसी भी उनके पीछे पड़े हुए थे अपनी पार्टी में शामिल करवाने के लिए। लेकिन, उनको राजकुमार भाटिया एबीवीपी में लेकर आए। पिछले पांच मार्च को जब इनकी जेटली से मुलाकात हुई थी तब उन्होंने कहा था कि अगले साल वे अपनी दोस्ती के 50वें सालगिरह पर इन्हीं के घर पर पार्टी करेंगे और दिल्ली यूनिवर्सिटी के दौर के सभी दोस्तों को उसमें बुलाएंगे।

मॉर्निंग वॉक पर ही पहली बार पड़ा दिल का दौड़ा
इससे पहले मशहूर वकील और जेटली के एक और दोस्त पूर्व सॉलिसटर जनरल रंजीत कुमार ने बताया कि अक्टूबर 2005 की सुबह अरुण जेटली को दिल्ली के लोधी गार्डन में मॉर्निंग वॉक के समय दिल का दौरा पड़ा था। इसके बाद उन्हें पास के अस्पताल में भर्ती किया गया। कुमार ने बताया कि उन्होंने गलत दिशा में कार चलाकर जेटली को हॉस्पिटल में पहुंचाया और उनकी जिंदगी बची। उन्होंने जेटली को याद करते हुए कहा कि मैं उनकी दोस्ती बहुत याद करने वाला हूं। वो एक ऐसे इंसान थे, जिन्होंने कभी अपना आपा नहीं खोया और जरूरत पड़ने पर आपके साथ खड़े रहे। रंजीत कुमार ने बताया कि वो 1974 में उनसे मिले, उन्होंने बताया कि जब मैं हिंदू कॉलेज में स्नातक के प्रथम वर्ष में था और वह दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ रहे थे। मैंने उनके पक्ष में चुनाव प्रचार किया। उन्होंने बताया कि जेटली ऊर्जावान व्यक्ति थे। आप उनसे एक बार मिलंगे तो उन्हें भूला नहीं पाएंगे। उनके पास इतने बेहतरीन गुण थे कि आप हमेशा उनके आसपास रहना चाहते हैं। ताकि आप सीखते रहे औक एक सख्स के तौर पर विकास करते रहें। 1999 से 2014 तक वो रोज उनके साथ घूमने जाते थे।
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