एडल्‍ट वेब सीरीज पर एक आर्मी Wife का एकता कपूर को Open Letter, चिट्ठी में बताया कैसा होता है फौजी की पत्‍नी का जीवन

मुंबई। मशहूर प्रोड्यूसर और बालाजी टेलीफिल्‍म्‍स की मालकिन एकता कपूर की वेब सीरिज को लेकर लोगों में खासा गुस्‍सा है। एकता की इस सीरीज में सेना के एक जवान की पत्‍नी को गलत तरह से प्रदर्शित किया गया है। आल्‍ट बालाजी जो कि एक ओटीटी प्‍लेटफॉर्म है, इस पर रिलीज इस सीरिज में आर्मी यूनिफॉर्म को भी गलत तरह से दिखाया गया है। उनके खिलाफ अब एफआईआर दर्ज कर ली गई है। अब एक आर्मी ऑफिसर की पत्‍नी ने एकता को ओपेन लेटर लिखा है। इस चिट्ठी के जरिए एकता को बताने की कोशिश की गई है कि जब जब एक आर्मी ऑफिसर और जवान देश की सुरक्षा में तैनात होते हैं तो कैसे उनकी पत्नियां घर पर एक 'साइलेंट सोल्‍जर' की तरह सबकुछ संभालती हैं।

राइटर स्‍वप्‍निल पांडे की चिट्ठी

राइटर स्‍वप्‍निल पांडे की चिट्ठी

एक आर्मी ऑफिसर की पत्‍नी स्वप्निल पांडे की तरफ से यह चिट्ठी एकता को लिखी गई है। स्‍वप्‍निल जो एक लेखक भी हैं उन्‍होंने अपनी इस चिट्ठी में लिखा, 'डियर, एकता कपूर, उम्‍मीद है कि इस मुश्किल समय में आप और आपका परिवार सुरक्षित है और साथ में रह रहा है। परिवार का साथ रहना किसी खुशी से कम नहीं होता क्‍यों हमें बहुत कम ही मौका मिल पाता है साथ रहने का। मैं आर्मी वाइव्‍स के समुदाय से आती हूं जो उस समय पीछे होती हैं जब उनके पति कहीं दूर देश की सेवा में लगे होते हैं। लेकिन कभी हम खुशकिस्‍मत होते हैं और शांति का समय देखते हैं जब कोई फौजी पिता और फौजी पति को हमारे साथ रहने का मौका मिलता है। सिर्फ इसलिए नहीं कि वह घर पर हैं बल्कि जब कभी भी वह मेरी छोटी-मोटी जिम्‍मेदारियों को साझा करते हैं तो भी मुझे खुशी मिलती है जो हमेशा एक कपल के तौर पर होती हैं।'

खून पसीने से हासिल होती है यूनिफॉर्म

खून पसीने से हासिल होती है यूनिफॉर्म

स्‍वप्‍निल आगे लिखती हैं, 'मेरा दिल खुशी से भर उठता है जब मेरे बच्‍चों को उनके साथ खेलते हैं और कभी-कभी उन्‍हें बच्चों के शौक दिखाने का मौका मुझे मिलता है। कृप्‍या ऐसा एक सेकेंड के लिए भी मत सोचिए कि एक सैनिक अपने परिवार के लिए जिम्‍मेदार नहीं होता है बल्कि जिस तरह का समर्पण भाव उनके दिल में परिवार के लिए होता है, उसकी कोई तुलना नहीं हो सकती है। यकीन मानिए, ये ऐसी भावनाएं जिन्‍हें बयां नहीं किया जा सकता है। वह सिर्फ अपनी ड्यूटी से जुड़े हुए हैं और अपनी यूनिफॉर्म पहनते हुए उन्‍होंने जो प्रण लिया था, उससे भी जुड़े हैं। वह यूनिफॉर्म जो उन्‍होंने अपने खून-पसीने से हासिल की है और हमेशा उनके लिए उनका देश पहले होता है और इसलिए ही वह हमें अपना समय नहीं दे पाते हैं। हम, उनके परिवार के सदस्‍य के तौर पर उनके देश के लिए उनके इस समर्पण भाव का सम्‍मान करते हैं। उनकी ड्यूटी हमारे लिए हमारी प्राथमिकताओं से ज्‍यादा एक गौरव की बात है क्‍योंकि हम मानते हैं कि एक सैनिक का कर्तव्‍य सबसे महान है।'

कितने लोग हैं जो देश के लिए जान देंगे

कितने लोग हैं जो देश के लिए जान देंगे

स्‍वप्‍निल ने इसमें आगे लिखा, 'ऐसे कितने लोग हैं जो अपने देश की सुरक्षा, रक्षा और उसकी संप्रभुता की रक्षा के लिए जान देने की हिम्‍मत रखते हैं? जब पूरा देश बंद दरवाजों के पीछे है, हजारों सैनिक आज भी अपनी ड्यूटी को पूरा कर रहे हैं, मौत का सामना कर रहे हैं, अपनी जिंदगी को खतरे में डाल रहे हैं और हमारे दुश्‍मन की चुनौती का महामारी के बाद भी सामना करने से नहीं चूक रहे हैं। कोरोना वायरस से बचने के लिए वह सभी सावधानियों के बाद भी उनकी चिंताओं के अलावा अगर मैं बताऊं कि पिछले माह हंदवाड़ा एनकाउंटर में देश के लिए सर्वोच्‍च बलिदान दिया, उनके परिवार आज भी उनकी शहादत को नहीं भूला पा रहे हैं।' स्‍वप्‍निल ने अपनी चिट्ठी में कर्नल डी रॉबर्टा का जिक्र किया है जो हाल ही में सिक्किम में आए हिमस्‍खलन में शहीद हो गए हैं।

भारत-चीन सीमा पर तैनात हजारों सैनिक

भारत-चीन सीमा पर तैनात हजारों सैनिक

उन्‍होंने चीन-भारत टकराव के बीच उन हजारों सैनिकों के बारे में भी एकता को बताया है जो लद्दाख में तैनात हैं। स्‍वप्‍निल के मुताबिक इन सैनिकों के परिवार के लिए यह बहुत ही मुश्किल है क्‍योंकि उन्‍हें मालूम है कि एक युद्ध शुरू करने के लिए एक गोली ही काफी है। इसके बाद उन्‍होंने एकता से पूछा है, 'अब आप मुझे बताइए कि क्‍या ऐसे समय में उनकी पत्नियों के पास समय होगा कि वो एडल्‍ट्री जैसा काम करें। निश्चित तौर पर आप इस बात से वाकिफ होंगी कि हमारे जवान सीमा पर कैसे तैनात हैं और घरों से दूर रहते हैं और आपको लगता है कि उनकी पत्नियों के पास उन्‍हें धोखा देने और उनके मान का अपमान करने का इतना समय काफी है। अगर ऐसा नहीं है तो फिर आपको ऐसा बकवास शो बनाने, आर्मी कल्‍चर और सेना के लोगों पर हमला करने की क्‍या जरूरत थी?'

'आपने नहीं सुने होंगे नाम, नमक और निशान जैसे शब्‍द'

'आपने नहीं सुने होंगे नाम, नमक और निशान जैसे शब्‍द'

स्‍वप्निल के मुताबिक एकता ने 'नाम, नमक और निशान' जैसे शब्‍द उस दुनिया में नहीं सुनेंगे जहां वह रहती हैं लेकिन यह वह हकीकत है जिसके बाद पूरी पलटन युद्ध के लिए आगे बढ़ती है। उन्‍हें मालूम होता है कि शायद कोई भी वापस नहीं आएगा लेकिन फौजियों को कई बरसों तक बस इसके लिए ही ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग के बाद वह एक सैनिक के तौर पर सामने आते हैं जो सम्‍मान के लिए जान दे देंगे। स्‍वप्‍निल ने अपनी चिट्ठी में कश्‍मीर में साल 2004 में शहीद मेजर गोरी की पत्‍नी सलमा शफीक घोरी, उरी में शहीद कर्नल वसंत वेणुगोपाल की पत्‍नी सुभाषिनी वसंत, शहीद लेफ्टिनेंट कमांडर डीएस चौहान की पत्‍नी करुणा चौहान का जिक्र किया है। इसके अलावा उन्‍होंने कारगिल शहीद कैप्‍टन विक्रम बत्रा की गर्लफ्रेंड के बारे में भी एकता को बताया जिन्‍होंने आज तक शादी नहीं की है।

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