केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन ने कहा, कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ एक्शन के लिए सेना के हाथ खुले
नई दिल्ली। केंद्रीय राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने साफ कर दिया है कि कश्मीर में सेना को जो वाजिब लगे वैसा एक्शन ले और उसे अपने एक्शन के लिए दिल्ली की तरफ देखने के लिए जरूरत नहीं है। सूचना एंव प्रसारण राज्यमंत्री राज्यर्धन सिंह राठौर ने कहा कि कश्मीर में एक्शन लेने के लिए सेना के हाथ खोल दिए गए हैं और दिल्ली का हस्तक्षेप नहीं है।

सेना पर उंगली उठाना समस्या का हल नहीं
राठौर जो कि खुद इंडियन आर्मी के रिटायर्ड ऑफिसर हैं, उन्होंने कहा कि लोग सिर्फ वहीं देखते हैं जो कैमरा उन्हें टीवी पर दिखाता है। कैमरा सिर्फ पत्थरबाजी ही दिखाता है जबकि हकीकत यह है कि कश्मीर में हालात काबू में हैं। राठौर ने एक न्यूजपेपर से कहा कि कश्मीर समस्या का हल सिर्फ सेना पर उंगली उठाने से नहीं मिलेगा। राठौर की यह टिप्पणी उस परिप्रेक्ष्य में हैं जिसमें लोग सेना की आलोचना कर रहे हैं। सीपीआई (एम) पार्टी समेत कुछ कश्मीर में सेना के तरीकों पर सवाल उठा रहे हैं। सेना का कहना है कि उसे घाटी में बहुत देर से सफलता मिलनी शुरू हुई है। सेना हिजबुल मुजाहिद्दीन के टॉप कमांडर सबजार भट को पिछले दिनों मार गिरान में सफल हुई है।
दिसंबर से पहले खत्म होंगे आतंकी
सेना ने दिसंबर से पहले घाटी में मौजूद करीब 200 आतंकियों को मार गिराने का संकल्प लिया है। सेना का कहना है कि घाटी में मौजूद आतंकी इस बार की सर्दियां नहीं देख पाएंगे। सेना ने घाटी में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। इस समय करीब 4,000 सैनिक घाटी में मौजूद हैं। सेना अगले दो माह तक कश्मीर घाटी से आतंकियों को खत्म करने के अपने मिशन पर काम कर रही है। सेना मानती है कि जब तक घाटी में मौजूद आतंकियों का सफाया नहीं होगा तब तक शांति नहीं लौट सकती है। सेना को इस समय विरोधियों का सामना भी करना पड़ रहा है जो उसके काम में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं।












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