जानिए कौन हैं केएम करियप्पा, जिन्हें भारत रत्न देने की आर्मी चीफ बिपिन रावत ने की है मांग
नई दिल्ली। आर्मी चीफ बिपिन रावत ने केएम करिअप्पा को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि भारतीय सेना के पहले कमांडर इन चीफ फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा को भारत रत्न दिया जाना चाहिए। सेना प्रमुख ने कहा कि जब देश के दूसरे लोगों को भारत रत्न मिल सकता है तो देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न केएम करिअप्पा को भी मिलना चाहिए। आखिर आर्मी चीफ की इस मांग के पीछे वजह क्या है? आखिर कौन हैं केएम करियप्पा और उन्होंने ऐसा क्या किया जिसकी वजह से खुद आर्मी चीफ ने भारत रत्न की मांग की है...

फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा
केएम करिअप्पा भारतीय सेना के पहले कमांडर इन चीफ फील्ड मार्शल थे। करिअप्पा को 1947 में भारत-पाकिस्तान युद्ध का हीरो भी माना जाता है। उस युद्ध में करिअप्पा वेस्टर्न फ्रंट को लीड कर रहे थे। भारतीय सेना में करिअप्पा उन दो अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्हें फील्ड मार्शल के फाइव स्टार रैंक से नवाजा गया है। फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा कर्नाटक के रहने वाले थे।

आजाद भारत के पहले कमांडर इन चीफ करिअप्पा
देश के आजाद होने के बाद साल 1949 में उन्हें आजाद भारत का पहला कमांडर इन चीफ बनाया गया। साल 1919 में करिअप्पा ब्रिटिश आर्मी में शामिल हुए थे। उस समय उन्हें कर्नाटक इन्फैंट्री मुंबई में अस्थाई सेकंड लेफ्टिनेंट का पद दिया गया। केएम करिअप्पा 1941 से 1942 तक इराक, सीरिया और ईरान में अलग-अलग जगह तैनात रहे।

बिपिन रावत ने की करिअप्पा को भारत रत्न देने की मांग
करिअप्पा ही पहले भारतीय थे जिन्हें साल 1942 में सैनिक यूनिट की कमांड दी गई। इसके बाद 1943-44 में उनको बर्मा में पोस्टिंग दी गई। इसके बाद कई साल पाकिस्तान के वजीरिस्तान में तैनात रहे। केएम करिअप्पा की शिक्षा मद्रास के मशहूर प्रेसीडेंसी कॉलेज से हुई। करिअप्पा ने लगभग 30 साल तक भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दीं। 1993 में केएम करिअप्पा का निधन हो गया।












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