Leh में सेना का हेलीकॉप्टर क्रैश, अंदर थे मेजर जनरल समेत 3 अफसर, फिर जो हुआ वो किसी चमत्कार से कम नहीं!
Army Helicopter Crash: रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और दुर्गम माने जाने वाले लद्दाख क्षेत्र से एक बड़ी और परेशान करने वाली खबर सामने आई है। भारतीय सेना का एक 'चीता' हेलीकॉप्टर नियमित उड़ान के दौरान अचानक क्रैश हो गया। इस खौफनाक हादसे में डिवीजन कमांडर मेजर जनरल सचिन मेहता और दो पायलट बाल-बाल बच गए हैं।
हालांकि, तीनों को चोटें आई हैं, जिन्हें इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। सेना ने इस गंभीर हादसे के पीछे की तकनीकी और यांत्रिक वजहों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दे दिए हैं।

वहीं दूसरी तरफ, सेना ने सोशल मीडिया पर फौज को बदनाम करने के मकसद से वायरल किए जा रहे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के वीडियो को 'फेक और दुर्भावनापूर्ण' बताते हुए उसका करारा पर्दाफाश किया है।
लद्दाख में कैसे हुआ हेलीकॉप्टर क्रैश?
यह हादसा 20 मई को लद्दाख के हाई-ऑल्टीट्यूड (अत्यधिक ऊंचाई वाले) सेक्टर में हुआ। सेना का चीता लाइट हेलीकॉप्टर एक रूटीन फ्लाइट पर था, जिसमें डिवीजन कमांडर मेजर जनरल सचिन मेहता के साथ दो पायलट सवार थे। उड़ान के दौरान अचानक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। गनीमत यह रही कि इस भीषण क्रैश में तीनों की जान बच गई, लेकिन उन्हें चोटें आई हैं। इस हादसे के बाद सेना के बेड़े में शामिल पुराने हो चुके चीता हेलीकॉप्टर्स की तकनीकी सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
सेना ने दिए 'कोर्ट ऑफ इंक्वायरी' के आदेश
इस हाई-प्रोफाइल हादसे के तुरंत बाद भारतीय सेना एक्शन में आ गई है। दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए एक औपचारिक जांच (Formal Probe) शुरू कर दी गई है। सेना ने इस मामले में आधिकारिक तौर पर 'कोर्ट ऑफ इंक्वायरी' (Court of Inquiry) का गठन किया है। यह जांच टीम इस बात का विश्लेषण करेगी कि हादसा किसी तकनीकी खराबी, मैकेनिकल फेलियर या फिर लद्दाख के बेहद खराब और चुनौतीपूर्ण मौसम (Environmental Factors) की वजह से हुआ।
सेना को बदनाम करने वाले 'फेक वीडियो' का पर्दाफाश
हेलीकॉप्टर क्रैश की खबरों के बीच, सोशल मीडिया और कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो तेजी से वायरल किया जा रहा था। इस वीडियो को लेकर भारतीय सेना ने शुक्रवार को बेहद कड़ा रुख अपनाया। सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर एक पोस्ट जारी कर इस वीडियो को पूरी तरह 'फर्जी, भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण प्रोपेगैंडा' करार दिया। सेना ने साफ कहा कि यह भारतीय सेना की छवि को धूमिल करने और मनगढ़ंत कहानियां फैलाने की एक सोची-समझी साजिश है।
वीडियो में दिख रहे लोग सेना से बर्खास्त और भगोड़े: सेना का खुलासा
इस वायरल क्लिप में आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस दिखाई दे रही है, जिसमें कुछ अन्य लोग भी बैठे हैं। सेना ने X पर पोस्ट कर इन लोगों की पूरी सच्चाई देश के सामने रख दी:
- चंदू चव्हाण, हरेंद्र यादव और पी. नरेंद्र: सेना ने स्पष्ट किया कि वीडियो में दिख रहे ये तीनों व्यक्ति भारतीय सेना के पूर्व कर्मी हैं, जिन्हें अनुशासनहीनता और फौज के नियमों के खिलाफ आचरण (Unsoldierly Conduct) के कारण बहुत पहले ही सेवा से बर्खास्त (Dismissed) किया जा चुका है।
- शंकर सिंह गुर्जर: वीडियो में मौजूद चौथे व्यक्ति की पहचान शंकर सिंह गुर्जर के रूप में हुई है, जो सेना का एक भगोड़ा (Deserter) है। इसके खिलाफ सैन्य और सिविल दोनों अदालतों में अनुशासनात्मक कार्यवाही चल रही है।
देशवासियों से सतर्क रहने की अपील
भारतीय सेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि ये बर्खास्त लोग अपने खुद के कदाचार और नौकरी से निकाले जाने के गुस्से को छिपाने के लिए सोशल मीडिया पर सेना के खिलाफ झूठा और भ्रामक नैरेटिव फैला रहे हैं। सेना ने देश के नागरिकों को सलाह दी है कि वे ऐसे किसी भी प्रोपेगैंडा का शिकार न बनें और सोशल मीडिया पर फैल रही इस तरह की फर्जी खबरों को लेकर पूरी तरह सतर्क रहें।












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