'क्या आप मुसलमान हैं?' पूछे जाने पर इरफान खान के बेटे ने दिया ये जवाब

नई दिल्ली, 11 जुलाई। दिवंगत मशहूर एक्टर इरफान खान के बेटे बाबिल खान सोशल मीडिया के काफी एक्टिव सदस्यों में से एक हैं। अपने पापा के नक्शे-कदम पर चलने वाले बाबिल इस वक्त सोशल मीडिया चर्चा का विषय बने हैं, वजह है उनका वो जवाब जो कि उन्होंने उस यूजर को दिया है, जिसने उनसे उनका धर्म पूछा था।

'भाई क्या आप मुसलमान हैं?'

'भाई क्या आप मुसलमान हैं?'

दरअसल बाबिल ने अपने पापा की कुछ तस्वीरें शेयर करते हुए एक इमोशनल पोस्ट लिखी थी, जिस पर एक यूजर ने उनके मजहब पर ही प्रश्न खड़े कर दिए। दरअसल उस यूजर ने पूछा था , 'भाई क्या आप मुसलमान हैं?'

 'नहीं मैं किसी धर्म से नहीं जुड़ा'

'नहीं मैं किसी धर्म से नहीं जुड़ा'

इसके जवाब में बाबिल ने कहा कि, 'मैं किसी धर्म से नहीं जुड़ा हुआ और ना ही किसी मजहब से बिलॉन्ग करता हूं, मैं गीता-कुरान-बाइबल और गुरु ग्रंथ साहिब सब पढ़ता हूं, मैं सब जगह से ज्ञान अर्जित करता हूं, जो मुझे जीवन में संभलने में मदद करते हैं। '

बाबिल ने कहा-'किसी एक धर्म के नहीं हूं मैं'

बाबिल ने कहा-'किसी एक धर्म के नहीं हूं मैं'

बाबिल के इस जवाब की जोरदार ढंग से तारीफ हो रही है, लोगों ने उनके लिए लिखा है कि ये बेटा तो बिल्कुल अपने बाप पर गया है क्योंकि इसी टाइप का बयान इरफान खान ने भी एक इंटरव्यू में तब दिया था, जब उनसे अपने नाम के आगे से खान हटाए जाने पर प्रश्न किया गया था। इरफान ने कहा था कि 'वो किसी एक धर्म के नहीं हैं।'

 'हर रोज शिवलिंग पर जल चढ़ाया करते थे इरफान'

'हर रोज शिवलिंग पर जल चढ़ाया करते थे इरफान'

आपको बता दें कि अपनी अदाकारी से हर किसी के दिल पर राज करने वाले बॉलीवुड अभिनेता इरफान खान का 29 अप्रैल, 2020 को निधन हो गया था। मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में इरफान खान ने 53 साल की उम्र में अंतिम सास ली थी, वो न्यूरोइंडोक्राइन ट्यूमर से पीड़ित थे। उनके निधन के बाद उनके ड्राइवर ने कहा था कि 'इरफान ईश्वर के सच्चे भक्त थे, वो हर रोज शिवलिंग पर जल चढ़ाया करते थे।' यही नहीं साल 2016 में उनका एक बयान काफी सुर्खियां बना था, जिसमें उन्होंने बकरीद पर होने वाली 'बकरे की कुर्बानी' पर बयान दिया था।

'बकरे की कुर्बानी से पुण्य नहीं मिलता'

'बकरे की कुर्बानी से पुण्य नहीं मिलता'

उन्होंने कहा था कि बकरे की कुर्बानी से पुण्य नहीं मिलता। मुसलमानों ने मुहर्रम का मजाक बनाया है। यह शोक के लिए है और हम क्या करते हैं? , जुलूस निकालते हैं और बकरे को कुर्बान कर देते हैं, ये कैसे खुदा तक पहुंचने का रास्ता हो सकता है, आप ही लोग बताइए, हमें इस दिन आत्म-चिंतन करना चाहिए और खुद को तलाशना चाहिए। प्रत्येक धर्म को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए और आज के समय में प्रासंगिकता को देखना चाहिए।

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