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Apollo CIE: भारत भर के डॉक्टरों के लिए क्लिनिकल इंटेलिजेंस इंजन शुरू, जानिए मकसद

अपोलो अस्पताल ने क्लिनिकल इंटेलिजेंस इंजन (CIE) लॉन्च किया है जो डॉक्टर को उचित उपचार के बारे में बता सकता है। ग्रामीण भारत के डॉक्टर अपोलो के CIE तक पहुंच सकते हैं।

apollo CIE

Apollo CIE के बारे में अपोलो अस्पताल की अपोलो अस्पताल में संयुक्त प्रबंध निदेशक, संगीता रेड्डी ने कहा, हमने क्लिनिकल इंटेलिजेंस इंजन (CIE) लॉन्च किया है जो डॉक्टर को उचित उपचार के बारे में बता सकता है। ग्रामीण भारत के डॉक्टर अपोलो के CIE तक पहुंच सकते हैं और अन्य लोगों की तरह बेहतर देखभाल कर सकते हैं। इसकी शक्ति ग्रामीण भारत तक पहुंचना है।

उन्होंने कहा कि हेल्थकेयर तेजी से बदल रहा है और तकनीक उस परिवर्तन को सक्षम कर रही है। उपचार के लिए एक विस्तृत योजना बनाने में डॉक्टर की मदद करने के लिए मान्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग किया जा रहा है।

अपोलो सीआईई के बारे में समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, एशिया के सबसे बड़े निजी अस्पताल समूहों में से एक Apollo ने क्लिनिकल इंटेलिजेंस इंजन (CIE) लॉन्च किया है। अपोलो 24x7 के प्लेटफॉर्म पर सभी भारतीय डॉक्टर इसका उपयोग कर सकेंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) में नवीनतम तकनीकों का उपयोग करके विकसित किया गया, Apollo CIE एक ही बार में सटीक जांच, डॉक्टरों की productivity और रोगी की संतुष्टि की जानकारी मिलेगी। दावा है कि इससे भारतीय स्वास्थ्य सेवा में क्रांति आएगी।

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    एक बयान के मुताबिक, क्लिनिकल इंटेलिजेंस इंजन (सीआईई) हेल्थ प्रोफेशनल्स को ट्रीटमेंट का पैटर्न की पहचान करने में मदद करेगा। यह अत्याधुनिक प्रणाली में बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण करने में सक्षम है। जो साधारण तरीकों से छूट भी सकते हैं।

    संख्या पर आधारित बातें करें तो अपोलो इंटेलिजेंस इंजन की शब्दावली में 1300 से अधिक मेडिकल कंडीशन और 800 लक्षणों की जानकारी है। इससे ओपीडी में रोज़मर्रा के केस मिक्स का 95 प्रतिशत कवर होता है। 100 से अधिक इंजीनियरों ने मिलकर अपोलो CIE तैयार किया है। इसके लिए 40 वर्षों के डेटा और मेडिकल मैगजीन के सहायक डेटा के साथ-साथ 1000 डॉक्टरों की सामूहिक बुद्धिमत्ता का उपयोग किया गया है।

    Apollo का दावा है कि यह दुनिया की सबसे बड़ी कनेक्टेड स्वास्थ्य डेटा झीलों में से एक की तरह है। इसका कुछ वैश्विक शैक्षणिक संस्थानों द्वारा परीक्षण और सत्यापन भी किया गया है। बयान के अनुसार अपोलो सीआई विशेष रूप से दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह स्वदेशी सफलता 500 से अधिक अपोलो डॉक्टरों और विशेषज्ञों की एक इन-हाउस टीम ने तैयार किया है, जिससे बेहतर नैदानिक परिणाम मिलेंगे। डॉक्टरों को अधिक शीघ्र और सटीक ट्रीटमेंट में मदद मिलेगी।

    अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप के चेयरमैन डॉ. प्रताप सी रेड्डी ने कहा, "मैं 90 साल का हो गया हूं। भारत को बेहतर बनाने की इच्छा के कारण Apollo CIE डेवलप किया गया। खासकर जब हम मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों की सुनामी जैसी स्थिति में हों तो क्लिनिकल इंटेलिजेंस इंजन स्वास्थ्य सेवा में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। उन्होंने कहा कि सीआईई को केवल अपोलो तक ही सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसे पूरे भारत के डॉक्टरों के साथ साझा करने की जरूरत है। इसलिए अपोलो भारत में प्रत्येक योग्य डॉक्टर को सीआईई की सुविधा देगा।

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