IAS की नौकरी छोड़कर बनीं सांसद, पति भी है प्रशासनिक अधिकारी, खूबसूरत है प्रेम कहानी
Aparajita Sarangi : 'आतंकवाद बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, अब भारत चुप नहीं बैठेगा, देश अब कमजोर नहीं है, बल्कि मजबूती के साथ मुंह तोड़ जवाब देता है', अपने इसी बयान की वजह से न्यूज चैनल से लेकर सोशल मीडिया तक भाजपा की ये तेजतर्रार सांसद छाई हुई हैं, जी हां हम बात कर रहे हैं, भाजपा MP अपराजिता सारंगी की, जिन्होंनें सिंगापुर के मंच से पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई है।
आपको बता दें कि पाकिस्तान की आतंकी करतूतों का खुलासा करने के लिए भारत ने अपने 7 प्रतिनिधिमंडल विदेश भेजे हैं, उन्हीं में से एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा, अपराजिता सारंगी भी हैं।

मालूम हो कि ये पहली बार नहीं है जब अपराजिता इस तरह से अपने बयान की वजह से चर्चा में आई हैं, इससे पहले संसद सत्र में '1984 लिखा बैग' इन्होंने ही नई नवेली सांसद प्रियंका गांधी को गिफ्ट किया था।
राजनीति के लिए IAS की नौकरी छोड़ी
सियासी गलियारों में ये भले ही आज चर्चित हों लेकिन अपने तेज-तर्रार रवैये के लिए ये शुरू से ही लोकप्रिय रही हैं। मालूम हो कि इन्होंने राजनीति ज्वाइन करने से पहले IAS की नौकरी छोड़ी दी थी। ओडिशा के भुवनेश्वर लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद अपराजिता सारंगी का जन्म 8 अक्टूबर 1969 को बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में हुआ था।
ट्रेनिंग सेशन में हुई थी संतोष सारंगी से मुलाकात! (Aparajita Sarangi)
पापा अजीत मिश्रा, अंग्रेजी के प्रोफेसर थे और मां भी टीचर थीं, इसलिए घर में शुरू से ही पढ़ने-लिखने का माहौल था। पढ़ने में शुरू से ही मेधावी अपराजिता ने भागलपुर विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में स्नातक किया और पहले ही प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की और ओडिशा कैडर में IAS अधिकारी बनीं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रेनिंग सेशन में उनकी मुलाकात संतोष कुमार सारंगी से हुई जो कि 1994 बैच के ओडिशा कैडर के ही IAS अधिकारी रहे हैं।
बेटे का नाम शिखर और बेटी का नाम अर्चिता सारंगी
दोनों में मित्रता हुई और फिर लगा दोनों साथ जिंदगी का सफर तय कर सकते हैं। दोनों की शादी परिवारवालों की मर्जी से हुई और आज दोनों दो बच्चों के माता-पिता हैं। इनके बेटे का नाम शिखर और बेटी का नाम अर्चिता सारंगी है। संतोष सारंगी वर्तमान में एमएनआरई सचिव का कार्य संभाल रहे हैं।
अपराजिता सारंगी का प्रोफेशनल करियर भी काफी चर्चित रहा है...
- 1996 में अपराजिता सारंगी ने उप-कलेक्टर और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य किया।
- 1998 से 2006 तक वो नुआपाड़ा, कोरापुट और बरगढ़ में जिला मजिस्ट्रेट रहीं।
- 2006 से 2009 तक उन्होंने भुवनेश्वर के नगर आयुक्त के रूप में कार्य किया।
- 2009 में पंचायती राज विभागों में सचिव पद संभाला।
- 2012 में 'शक्ति सम्मान' से सम्मानित किया गया था।
भुवनेश्वर से जीतकर संसद पहुंचीं
साल 2018 में अपराजिता सारंगी ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया। 2019 के आम चुनावों में, उन्होंने भुवनेश्वर से लोकसभा सीट पर जीत हासिल की और सांसद बनीं। वे भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं ।












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