डीजल की बढ़ी कीमतों पर मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने को तैयार सहयोगी दल
नई दिल्ली। लॉकडाउन में जिस तरह से देश के किसानों की हालत बदतर हुई है, उसपर कई विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा है और किसानों को त्वरित राहत देने की मांग की थी। लेकिन अब विपक्ष के साथ एनडीए सरकार के सहयोगी दल ही सरकार पर भरोसा खोते नजर आ रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने बुधवार को कहा कि वह किसानों और समाज के पिछड़े वर्ग के हित के लिए किसी भी तरह का बलिदान देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के किसानों, समाज के पिछड़े वर्ग के हितों की रक्षा के लिए और संघीय ढांचे को मजबूत करने के लिए वह कोई भी बलिदान देने के लिए तैयार हैं।

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सुखबीर सिंह बादल ने साफ किया है कि शिरोमणि अकाली दल के लिए कोई मंत्रालय, सरकार, गठबंधन जनहित से बढ़कर नहीं है। अन्नदाता के हितों लिए ये तमाम चीजें हमारे लिए मायने नहीं रखती हैं। हम संघीय ढांचे को लेकर प्रतिबद्ध हैं, हमे यह जानकर आश्चर्य होता है कि कांग्रेस पार्टी जिसने संघीय ढांचे को चरणबद्ध तरीके से खत्म किया है, वह इस पर बात कर रही है। यही नहीं पिछले कुछ दिनों से जिस तरह से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ रहे हैं, उसपर भी सुखबीर सिंह बादल ने नाराजगी जाहिर की है।
सुखबीर सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार डीजल की कीमत 10 रुपए कम करने के लिए तैयार है तो पंजाब के सभी दल इस बात पर तैयार हैं कि वह दिल्ली में केंद्र सरकार के खिलाफ ईंधन के दामों को लेकर आंदोलन शुरू करेंगे। किसान पहले से ही मुश्किलों से जूझ रहे हैं, ऐस में पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दाम उनकी मुश्किल को और बढ़ा रहे हैं, लिहाजा केंद्र सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने कृषि खरीद और गारंटी को लेकर जो वादा किया था, उसे निभाएं। अगर सरकार ने अपने इस वादे की चिंता नहीं करेगी तो हम भी नेतृत्व को लेकर कोई चिंता नहीं करेंगे। बता दें कि यह पहला मौका नहीं है कि शिरोमणि अकाली दल ने एनडीए से अलग रुख अख्तियार किया है। नागरिकता कानून को लेकर भी शिरोमणि अकाली दल ने अलग राय रखी थी। गौरतलब है कि शिरोमणि अकाली दल के पास लोकसभा में 2 और राज्यसभा में 3 सांसद हैं। जबकि पंजाब में कुल 15 विधायक हैं।












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