शौक तो बहुतों के होते हैं लेकिन इस लड़की जैसा नहीं, पूरा करने के लिए मुफ्त में चलाती है बस
कोचि, 26 जुलाई। केरल के कोचि शहर की रहने वाली एन मैरी एनसलेन हर रविवार को रोड पर भारी सवारी बस को निकलती है। ट्रैफिक के बीच एन जिस तरह से सवारियों से भरी बस को लेकर निकलती हैं और किसी अच्छे ड्राइवर की तरह ही होता है लेकिन अंतर यह है कि एन यह काम पैसे कमाने के लिए नहीं करती है। बल्कि उनका एक ऐसा शौक है जिसे पूरा करने के लिए वह इस काम को करती हैं।

20 साल की लड़की तोड़ रही वर्जनाएं
भारी या बड़े वाहन जैसे ट्रक या बस चलाना आम तौर पर पुरुषों के काम समझे जाते रहे हैं लेकिन कोचि की 20 साल की ये लड़की उस वर्जनाओं को तोड़ रही है जो लोगों के दिमाग में ठूंस कर भर दी गई है। एर्नाकुलम लॉ कॉलेज में कानून की पढ़ाई कर रही ये छात्रा खुद ही प्राइवेट बस चलाने के लिए पीछे की वजह भी बताती है।

बिजी रोड पर लेकर निकलती हैं सवारियों से भरी बस
एन कहती हैं कि वह हर रविवार को बस को अति व्यस्त कक्कानंद-पेरूम्बदप्पू रोड से लेकर गुजरती है। वह कहती है कि बाकी दिनों में वह केवल शाम में ही बस को चलाकर घर ले जाती हैं। बाकी दिनों में ड्राइवर बस को पास के पेट्रोल पंप पर खड़ा कर देता है। क्लास के बाद मैं बस को वहां से लेती हैं और उसके मालिक के घर पर ले जाती हैं। दरअसल बस का मालिक एन का पड़ोसी है।

महिला को देखकर शुरुआत में दंग रह जाते थे लोग
एन को बस चलाते अब आठ महीने हो चुके हैं। वह कहती हैं कि उन्हें आज भी पहला दिन याद है। शुरुआत में लोग उन्हें बस चलाते देख दंग रह जाते थे। लोग सोचते थे कि महिला बस चला रही है तो हादसा जरूर होना है। हालांकि अब वे मुझे हर रविवार को इस रोड पर गाड़ी चलाते देखने के आदी हो गए हैं।

दूसरे बस ड्राइवर देते थे अजीब रिएक्शन
महिला होने के चलते उनके साथ एक और दिक्कत आती थी। दूसरे ड्राइवर इस बात को स्वीकार नहीं कर पाते थे कि मैं बस चला रही हूं। वे अक्सर पीछा करते और उनकी बस को ओवरटेक करने की कोशिश करते थे। कई बार तो उन्हें कमेंट का भी सामना करना पड़ता था। वह कहती हैं कि यह बहुत असहज करने वाला होता था। हालांकि अब सब ठीक हो गया है और कई ड्राइवर एन के दोस्त भी बन चुके हैं।

भारी वाहन चलाने का है शौक
इसके साथ ही बस में काम करने वाले कंडक्टर और दूसरे कर्मचारी भी मेरे दोस्त हैं। सभी शिफ्ट के बाद साथ में खाना भी खाते हैं।
हमने शुरुआत में ही बताया था कि एन ने यह सब पैसे के लिए नहीं बल्कि शौक में किया था। दरअसल एन को हमेशा बड़े वाहनों का शौक था। वह कहती हैं कि मुझमें भारी वाहनों को लेकर जुनून है। इसलिए मैं बस मुफ्त में चलाती हूं।












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