आंध्र प्रदेश सरकार ने लागू की नई शराब नीति, अब बाजार की मांग के आधार पर होगी खरीद
Andhra Pradesh News: आंध्र प्रदेश सरकार ने शराब की बिक्री और वितरण के लिए एक नई नीति लागू की। निषेध और आबकारी विभाग के मुताबिक, यह नई नीति बाजार की मांग के आधार पर शराब की खरीद को निर्धारित करती है।
इस नई नीति का उद्देश्य शराब ब्रांडों की आपूर्ति और बिक्री को बाजार की आवश्यकताओं के साथ संतुलित करना है। इसके तहत राज्य में शराब खरीद के लिए एक कंप्यूटर आधारित मॉडल का उपयोग किया जा रहा है।

क्या है पुरानी और नई शराब नीति में अंतर?
इससे पहले, वाईएसआरसीपी सरकार के दौरान शराब खरीद और बिक्री पर उपभोक्ताओं के पास सीमित विकल्प थे और शराब की कीमतें भी अधिक थीं। नई नीति के तहत, राज्य में प्रीमियम विकल्प भी उपलब्ध होंगे, जिससे उपभोक्ताओं को विभिन्न गुणवत्ता वाले ब्रांडों तक पहुंच प्राप्त होगी। इस नई नीति के साथ, राज्य भर में सभी पंजीकृत ब्रांडों को समान रूप से बिक्री का मौका मिलेगा।
शराब की खरीद और बिक्री के लिए नया मॉडल
नई शराब नीति के अनुसार, शराब ब्रांड शुरू में बाजार में 10,000 केस की सप्लाई करेंगे। इसके बाद, पिछले तीन महीनों की बिक्री के आधार पर भविष्य की खरीद निर्धारित की जाएगी। इससे ब्रांड अपनी बिक्री का 150 प्रतिशत तक अधिक बेच सकेंगे। यह मॉडल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों दोनों के लिए लागू है, जो अब आंध्र प्रदेश के बाजार में प्रवेश कर रहे हैं।
डिजिटल भुगतान और आबकारी राजस्व
वाईएस जगन मोहन रेड्डी के प्रशासन के दौरान, राज्य की शराब दुकानों में केवल नकद लेनदेन का प्रचलन था। अब, नई नीति के तहत सभी शराब की दुकानों में डिजिटल भुगतान** अनिवार्य कर दिया गया है। डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के बाद, जून के बाद से इसमें 9 प्रतिशत की मासिक वृद्धि हुई है, जिससे राज्य में पारदर्शिता बढ़ी है।
लाइसेंस आवंटन और राजस्व
14 अक्टूबर को, राज्य सरकार ने 3,396 शराब की दुकानों को लॉटरी के माध्यम से लाइसेंस जारी किए, जिससे लगभग 1,800 करोड़ रुपये का राजस्व उत्पन्न हुआ। इस प्रक्रिया में 90,000 आवेदकों ने हिस्सा लिया, और घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्रोतों से आवेदन स्वीकार किए गए। सरकार का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2024-25 में लाइसेंस शुल्क और शराब की बिक्री से लगभग 20,000 करोड़ रुपये जुटाना है।
पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने नई शराब नीति की आलोचना की है। रेड्डी ने नायडू पर आरोप लगाया कि वे शराब माफिया के लिए वातावरण बना रहे हैं और राज्य के हितों की अनदेखी कर रहे हैं। रेड्डी ने चेतावनी दी है कि अगर इन नीतियों में संशोधन नहीं किया गया, तो वह इनके खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करेंगे।
आंध्र प्रदेश की नई शराब नीति राज्य की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प प्रदान करने का प्रयास है। बाजार की मांग के अनुसार शराब की खरीद और बिक्री को संतुलित करने का यह प्रयास, राज्य में पारदर्शिता और राजस्व दोनों को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। हालांकि, इस नीति को लेकर राजनीतिक माहौल में भी खींचतान बनी हुई है, जिससे आने वाले समय में और विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।












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