Andhra Pradesh HC का बड़ा फैसला, मायके से मिली प्रॉपर्टी पर पति का हक नहीं, संपत्ति के मामले में क्या कहता है
Andhra Pradesh High Court Verdict: हिंदू उत्तराधिकार कानून को लेकर आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी हिंदू महिला को अपने माता-पिता से विरासत में कोई संपत्ति मिली है और उसकी मृत्यु बिना वसीयत किए और बिना किसी संतान के हो जाती है, तो उस संपत्ति पर उसके पति या ससुराल वालों का कोई कानूनी अधिकार नहीं होगा।
ऐसी स्थिति में वह संपत्ति वापस महिला के पिता के कानूनी वारिसों (जैसे महिला के भाई-बहन) के पास चली जाएगी। विस्तार से जानिए हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा? महिला की संपत्ति के मामले में क्या कहता है कानून...

क्या है पूरा मामला?
यह फैसला एक खास केस की सुनवाई के दौरान आया। साल 2002 में एक महिला (दादी) ने अपनी संपत्ति अपनी पहली पोती को गिफ्ट कर दी थी। 2005 में उस पोती की बिना संतान मृत्यु हो गई। इसके बाद दादी ने पुराना गिफ्ट रद्द कर दिया और वही संपत्ति अपनी दूसरी पोती के नाम वसीयत कर दी। 2012 में दादी की मौत के बाद दूसरी पोती ने संपत्ति अपने नाम करवाने की प्रक्रिया शुरू की। शुरुआत में राजस्व अधिकारी ने दूसरी पोती के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन पहली पोती के पति ने इसे चुनौती दी। जॉइंट कलेक्टर ने RDO का फैसला पलटते हुए पति के पक्ष में आदेश दे दिया।
Women Property Rights India 2026: संपत्ति के मामले में क्या कहता है कानून?
हाईकोर्ट के जस्टिस तारलाडा राजशेखर राव ने अपने फैसले में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 15(2)(a) का हवाला दिया। इस धारा के मुताबिक, अगर किसी महिला को संपत्ति उसके माता-पिता से मिली हो और उसकी कोई संतान न हो, तो उसकी मौत के बाद वह संपत्ति उसके पिता के परिवार (कानूनी वारिसों) को ही मिलेगी, न कि पति या ससुराल पक्ष को।
सीधे शब्दों में कहें तो अगर महिला को मायके से संपत्ति मिली है और उसकी कोई संतान नहीं है और उसने वसीयत नहीं बनाई है तो उसकी मौत के बाद उस संपत्ति पर पति का हक नहीं होगा, बल्कि वह संपत्ति महिला के पिता के परिवार को मिलेगी।
हाईकोर्ट ने क्यों पलटा फैसला?
मामला जब हाईकोर्ट पहुंचा, तो कोर्ट ने साफ कर दिया कि पहली पोती को संपत्ति उसके परिवार (नानी/माता-पिता की ओर से) मिली थी और उसकी कोई संतान नहीं थी इसलिए उस संपत्ति पर उसके पति का कोई हक नहीं बनता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार ऐसी संपत्ति महिला के पिता के कानूनी वारिसों को ही जाएगी।
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि भले ही नानी द्वारा गिफ्ट डीड रद्द करना तकनीकी रूप से सही था या नहीं, लेकिन कानून की धारा 15(2)(a) यहां सबसे ऊपर है। चूंकि पहली नातिन को संपत्ति अपने ननिहाल (मां/पिता के पक्ष) से मिली थी और उसकी कोई संतान नहीं थी, इसलिए उसकी मौत के तुरंत बाद वह संपत्ति कानूनी रूप से उसके पिता के वारिसों की हो गई। पति को उस पर दावा करने का कोई हक नहीं है।
क्यों जरूरी है यह जानकारी?
अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि शादी के बाद महिला की संपत्ति पर पति का अधिकार होता है लेकिन कानून ऐसा हर मामले में नहीं कहता। इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि संपत्ति का स्रोत (मायका या ससुराल) और संतान, वसीयत बहुत मायने रखती हैं।
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का यह फैसला महिलाओं के संपत्ति अधिकारों को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह आम लोगों के लिए एक जरूरी कानूनी जानकारी है, जिससे वे अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
यह फैसला उन परिवारों के लिए बहुत राहत भरा है जो अपनी बेटियों को संपत्ति तो देना चाहते हैं, लेकिन इस बात से डरते हैं कि बेटी की असमय मृत्यु (बिना संतान के) होने पर उनकी पुश्तैनी संपत्ति दामाद या उसके परिवार के पास चली जाएगी। अगर किसी महिला की संतान है, तो संपत्ति उसके बच्चों को मिलेगी। लेकिन अगर संतान नहीं है और संपत्ति माता-पिता से मिली है, तो वह ससुराल न जाकर वापस मायके के वारिसों को मिलेगी।












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