Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Andhra Pradesh में 2 या 3 बच्चे पैदा करने पर मिलेंगे ₹25,000, पैरेंटल लीव 12 महीने की और भी कई सुविधाएं

Andhra Pradesh Population Management Policy: भारत में लंबे समय तक जनसंख्या बढ़ने को सबसे बड़ी चुनौती माना जाता रहा। लेकिन अब तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है। देश के कुछ राज्यों में जन्म दर घटने को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। इसी बीच आंध्र प्रदेश की सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने जनसंख्या पर नई बहस छेड़ दी है। मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू (N. Chandrababu Naidu) ने घोषणा की है कि अगर किसी परिवार में दूसरा या तीसरा बच्चा होता है, तो सरकार उस समय 25,000 रुपये की आर्थिक सहायता देगी।

मुख्यमंत्री नायडू ने बताया कि सरकार 1 अप्रैल से इस नई नीति को लागू करने की योजना बना रही है। इसके तहत बच्चे के जन्म के समय 25,000 रुपये की सहायता दी जाएगी। इसके अलावा तीसरे बच्चे के लिए परिवार को पांच साल तक हर महीने 1,000 रुपये की अतिरिक्त मदद दी जाएगी। इतना ही नहीं, तीसरे बच्चे को 18 साल की उम्र तक मुफ्त शिक्षा देने का प्रस्ताव भी रखा गया है। सरकार का मानना है कि आर्थिक सहायता और सामाजिक सुविधाएं मिलने से परिवार ज्यादा बच्चों के बारे में सकारात्मक सोच सकते हैं।

Andhra Pradesh 2-3 children 25000 incentive parental leave population policy

सरकार का तर्क है कि राज्य में तेजी से गिरती प्रजनन दर आने वाले समय में आर्थिक और सामाजिक संतुलन के लिए चुनौती बन सकती है। इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर दिलचस्प बात यह है कि जनसंख्या को लेकर बहस इससे पहले भी सुर्खियों में आ चुकी है। कुछ महीने पहले RSS प्रमुख मोहन भागवत ( Mohan Bhagwat) ने एक कार्यक्रम में कहा था कि हिंदू परिवारों को कम से कम तीन बच्चों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया था कि कई विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर किसी समाज की औसत प्रजनन दर बहुत कम हो जाए तो भविष्य में उसकी जनसंख्या तेजी से घट सकती है।

Baba Bageshwar: हिंदुओं से 4 बच्चे पैदा करने की अपील पर घिरे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, फिर छिड़ी बहस
Baba Bageshwar: हिंदुओं से 4 बच्चे पैदा करने की अपील पर घिरे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, फिर छिड़ी बहस

58 प्रतिशत परिवारों में सिर्फ एक ही बच्चा है: CM नायडू

विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री नायडू ने कहा कि राज्य में परिवारों का ढांचा तेजी से बदल रहा है। आंकड़ों के मुताबिक लगभग 58 प्रतिशत परिवारों में सिर्फ एक ही बच्चा है। करीब 2.17 लाख परिवार ऐसे हैं जिनके दो बच्चे हैं, जबकि लगभग 62 लाख परिवारों में तीन या उससे अधिक बच्चे हैं। उन्होंने बताया कि लगभग तीन लाख परिवार ऐसे हैं जिनके पास दो बच्चों की जगह सिर्फ एक बच्चा है, जबकि करीब इतने ही परिवारों में दो से ज्यादा बच्चे हैं। नायडू ने कहा कि यह ट्रेंड आने वाले समय में राज्य की जनसंख्या संरचना को प्रभावित कर सकता है।

माता-पिता को भी मिलेंगी खास छुट्टियां

नई नीति में सिर्फ आर्थिक मदद ही नहीं, बल्कि परिवार के लिए कई सामाजिक सुविधाओं की भी घोषणा की गई है। सरकार 12 महीने की पैरेंटल लीव देने का प्रस्ताव कर रही है, जिसमें दो महीने की पितृत्व अवकाश भी शामिल होगा।

इसके अलावा तीसरा बच्चा होने पर दंपतियों को विशेष छुट्टियां देने की भी योजना है। राज्य सरकार हर 50 बच्चों पर चाइल्ड-केयर सेंटर स्थापित करेगी ताकि कामकाजी माता-पिता को बच्चों की देखभाल में मदद मिल सके। महिलाओं की सुरक्षा और कामकाजी माहौल बेहतर बनाने के लिए वर्किंग वूमेन हॉस्टल, पिंक टॉयलेट और "She Cabs" जैसी सुविधाएं भी बढ़ाई जाएंगी।

IVF सेंटर और मातृत्व सुविधाओं पर भी जोर

सरकार ने मातृत्व स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए मातृत्व उत्कृष्टता केंद्र (Matrutva Centres of Excellence) स्थापित करने की घोषणा की है, जहां IVF सेवाएं उपलब्ध होंगी।

इसके साथ ही अनावश्यक सीजेरियन ऑपरेशन को हतोत्साहित करने की भी योजना बनाई जा रही है। राज्य के 175 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दो सप्ताह तक विशेष क्लीनिक चलाए जाएंगे और बच्चों की देखभाल से जुड़े शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

घटती आबादी पर सरकारें क्यों चिंतित हैं? (Andhra Pradesh Fertility Rate)

मुख्यमंत्री नायडू ने विधानसभा में बताया कि आंध्र प्रदेश की कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate-TFR) पिछले तीन दशकों में काफी गिर गई है। 1993 में यह दर लगभग 3.0 थी, जो अब घटकर 1.5 रह गई है। जबकि किसी भी समाज में जनसंख्या संतुलन बनाए रखने के लिए आदर्श टीएफआर 2.1 माना जाता है।

उन्होंने कहा कि अगर जन्म दर इसी तरह कम होती रही तो भविष्य में राज्य को कामकाजी आबादी की कमी का सामना करना पड़ सकता है, जैसा कि जापान, दक्षिण कोरिया और इटली जैसे देशों में देखने को मिला है।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी फोकस

सरकार की योजना सिर्फ जन्म दर बढ़ाने तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी बढ़ाना भी जरूरी है।

फिलहाल राज्य में महिलाओं की कार्यभागीदारी करीब 31 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर 59 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विशाखापट्टनम में 172 करोड़ रुपये की लागत से वर्किंग वूमेन हॉस्टल बनाया जाएगा।

सरकार ने जनता से मांगे सुझाव

आंध्र प्रदेश सरकार ने इस नई पॉपुलेशन नीति के ड्राफ्ट पर जनता से सुझाव भी मांगे हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि यह नीति सिर्फ जनसंख्या बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि राज्य की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए बनाई जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि आर्थिक प्रोत्साहन और सामाजिक सुविधाओं के साथ यह पहल आने वाले वर्षों में आंध्र प्रदेश की घटती जन्म दर को संतुलित करने में मदद करेगी।

अब शुरू होगी नई बहस

आंध्र प्रदेश सरकार की यह पहल ऐसे समय आई है जब दुनिया के कई देशों में कम होती जन्म दर बड़ी समस्या बन चुकी है। सरकार ने इस नीति के मसौदे पर जनता से सुझाव भी मांगे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आर्थिक प्रोत्साहन वास्तव में परिवारों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित कर पाएगा या नहीं। लेकिन इतना तय है कि जनसंख्या को लेकर देश में चर्चा अब नई दिशा में बढ़ती दिख रही है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+