कांग्रेस में शर्मिला की एंट्री से दिलचस्प हुई आंध्र की राजनीति, जगन और नायडू के सामने होंगी ये चुनौतियां
आंध्र प्रदेश में अपने पतन की शुरुआत के एक दशक बाद अब कर्नाटक और पड़ोसी तेलंगाना की जीत ने राज्य में कांग्रेस के लिए आशा की किरण जगाई है। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी की बेटी और वर्तमान मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी की बहन वाईएस शर्मिला का पार्टी में आना कांग्रेस के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला है।
वाईएस शर्मिला इस हफ्ते कांग्रेस में शामिल होंगी। सोमवार को शर्मिला ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व शर्मिला को इस साल लोकसभा चुनाव के साथ-साथ आंध्र प्रदेश में एक महत्वपूर्ण भूमिका देगा।

कांग्रेस पार्टी ने शर्मिला को राज्य में एपीसीसी प्रमुख या स्टार प्रचारक बनाने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, ऐसी संभावना है कि शर्मिला के कांग्रेस में शामिल होने से टीडीपी-जेएसपी गठबंधन की संभावनाओं को नुकसान हो सकता है। जो वाईएसआरसी विरोधी वोटों को विभाजित न होने देने पर बार-बार जोर दे रहे हैं।
हालांकि कांग्रेस राज्य में सरकार बनाने या विपक्ष में बैठने को लेकर आशान्वित नहीं है, लेकिन नेतृत्व को भरोसा है कि वह किंगमेकर की भूमिका निभाएगी। पार्टी का यह भी दृढ़ विश्वास है कि उसका वोट शेयर मौजूदा 6% से बढ़कर 10% या उससे अधिक हो जाएगा। शर्मिला के कांग्रेस में आने से उन नेताओं का समर्थन मिलने की उम्मीद है जो या तो पार्टी छोड़ चुके हैं या राज्य विभाजन के बाद से निष्क्रिय हैं।
यह रणनीति काम करती भी दिख रही है क्योंकि अल्ला रामकृष्ण रेड्डी (जो वाईएसआर परिवार के जाने-माने वफादार रहे हैं) ने मंगलागिरी विधायक पद और वाईएसआरसी के प्राथमिक नेतृत्व से इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद शर्मिला का अनुसरण करने का ऐलान किया था।
2024 के चुनावों में टीडीपी-जेएसपी गठबंधन की सफलता के लिए वोट ट्रांसफर कुंजी
क्या 2024 के चुनावों में टीडीपी-जेएसपी गठबंधन की राह आसान होगी? दोनों दलों के नेता आशावादी हैं कि गठबंधन निश्चित रूप से चुनाव में विजयी होगा और राज्य में सरकार बनाएगा। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हालांकि दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व वाले नेता गठबंधन को लेकर आश्वस्त हैं। जब दोनों पार्टियों के बीच वोटों के हस्तांतरण की बात आती है तो यह आसान नहीं होगा।
हालांकि टीडीपी सुप्रीमो एन चंद्रबाबू नायडू और जन सेना प्रमुख पवन कल्याण ने गठबंधन की घोषणा के बाद कई दौर की बातचीत की है और संबंधित दलों के कार्यकर्ताओं से मतभेदों भुलाकार समन्वय के साथ काम करने की अपील की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि, दोनों पार्टियों के बीच अधिकतम सीमा तक वोटों के सुचारू हस्तांतरण हो। लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग दिख रही है क्योंकि असंतोष की आवाजें सामने आ रही हैं, खासकर जेएसपी की ओर से।
विश्लेषकों का मानना है कि सीट बंटवारे के समझौते की घोषणा के बाद दोनों पार्टियों में असंतोष और बढ़ सकता है। हालांकि, दोनों पार्टियों के नेताओं ने साफ कर दिया है कि सीट बंटवारे को लेकर नायडू और पवन कल्याण जो भी फैसला लेंगे, वे उसका पालन करेंगे।
तेलुगु देशम पोलित ब्यूरो के सदस्य यानमाला रामकृष्णुडु ने विश्वास जताया है कि जेएसपी के साथ गठबंधन में टीडीपी निश्चित रूप से 2024 के चुनावों में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आएगी, उन्होंने कहा कि पार्टी कल्याण और विकास को समान महत्व देने के लिए प्रतिबद्ध है।
असंतोष से निपटना इस साल YSRC के लिए एक बड़ी चुनौती है
चुनाव से पहले के महीने अक्सर राजनीतिक दलों के लिए अग्निपरीक्षा जैसे होते हैं, खासकर सत्ता में बैठे दलों के लिए। सत्तारूढ़ वाईएसआरसी कोई अपवाद नहीं है क्योंकि यह 2024 के विधानसभा चुनावों में विपक्षी टीडीपी और अभिनेता-राजनेता पवन कल्याण की जन सेना पार्टी (जेएसपी) गठबंधन का सामना करने के लिए तैयार है। जबकि वाईएस जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआरसी अपने द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार करेदी। राज्य में अपने चुनाव अभियान के दौरान, विपक्षी दल सरकार के सामने आने वाली 'सत्ता-विरोधी लहर' पर निर्भर रहेंगे।
मुख्यमंत्री और वाईएसआरसी अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने पिछले साढ़े चार वर्षों में महिलाओं के उत्थान पर विशेष जोर देते हुए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं। विकास और कल्याणकारी पहल वाईएसआरसी को चुनावों में विपक्षी दलों से मुकाबला करने के लिए बहुत जरूरी हथियार दे सकती है। लेकिन सत्ता विरोधी लहर के मुद्दे के अलावा, पार्टी को सीटों के आवंटन की प्रक्रिया के दौरान बढ़ते असंतोष से भी निपटना होगा। हाल ही में पार्टी के कई नेताओं ने खुलकर अपना गुस्सा व्यक्त किया है और कुछ अन्य ने अपने पदों से इस्तीफा भी दे दिया है।












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