अनंत कुमार की मां को भी था कैंसर, गरीबी की वजह से पिता दे पाते थे केवल एक गोली
केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार ने सोमवार 56 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। कई महीनों तक विदेश में इलाज कराने के बावजूद वो कैंसर को नहीं हरा सके।

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार ने सोमवार 56 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। कई महीनों तक विदेश में इलाज कराने के बावजूद वो कैंसर को नहीं हरा सके। भाजपा के कद्दावर नेता रहे अनंत कुमार के नाम जीएसटी पास कराने से लेकर यूएन में कन्नड़ भाषा में भाषण देने समेत कई उपलब्धियां हैं, लेकिन एक और बात है जिसके लिए अनंत कुमार को हमेशा याद किया जाएगा और वो है कैंसर की दवाइयां सस्ती कराना। भारत में कैंसर की दवाइयां सस्ती कराने का श्रेय अनंत कुमार को जाता।

कैंसर की दवाइयां सस्ती कराने में कुमार का अहम रोल
कैंसर की दवाइयां सस्ती कराने के लिए अनंत कुमार ने काफी मेहनत की। उन्होंने अपने घर में महंगी होने के कारण कैंसर की दवाइयों की कमी देखी थी, इसलिए वो चाहते थे कि इन दवाइयों के दाम सस्ते हों। अनंत कुमार ने एक बार अपनी जिंदगी के अनछुए पहलुओं को पत्रकार के साथ साझा किया था और तब दवाइयां सस्ती कराने के पीछे उनके कारण का पता चला था। अनंत कुमार एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे।

महंगी दवाइयों के कारण मां का नहीं हो पाया था इलाज
उनके पिता भारतीय रेलवे में सेकेंड डिवीजन क्लर्क थे। कर्नाटक के हुबली में रेलवे कॉलोनी में पले-बढ़े कुमार की मां को कैंसर हो गया था। कैंसर के इलाज के लिए डॉक्टर ने उनकी मां को रोजाना दो गोली खाने को दी। उस वक्त घर में कुमार के पिता इकलौते कमाने वाले थे। अनंत कुमार ने बताया था कि पिता की एक महीने की तनख्वाह 1200 रुपये होती थी और एक गोली की कीमत तब 20 रुपये थी। ऐसे में दवाई पूरी सैलरी के बराबर थे। अनंत कुमार के पिता के सामने तब शायद जिंदगी की सभी बड़ी मुश्किल थी।

मंत्री बनने के बाद इस दिशा में किया खूब काम
पत्नी का इलाज ठीक से करें या परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम। इस मुश्किल दोराहे पर खड़े उनके पिता ने पत्नी को रोजाना दो की बजाय एक गोली देने का फैसला लिया। महंगाई के कारण उनकी मां का सही तरीके से इलाज नहीं हो पाया और उनका देहांत हो गया। इस घटना से वो काफी प्रभावित हुए और तभी उन्होंने कैंसर की दवाइयां सस्ती कराने का ठान लिया। जब अनंत कुमार सांसद बनकर रसायन और उर्वरक मंत्री बने तो उन्होंने इस दिशा में काफी काम किया।

85 फीसदी तक सस्ती हुईं थी दवाएं
उन्होंने प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया। 2011 में यूपीए सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना में जेनरिक दवाइयां बाजार के दाम से कम कीमत पर मिलती हैं। कुमार ने कहा था कि उन्होंने मां को महंगी दवाई के कारण दर्द में देखा है और इसी बात ने उन्हें इस योजना के विस्तार के लिए प्रेरित किया। उनके लगातार प्रयासों का ही नतीजा था कि अप्रैल 2017 में कैंसर की दवाइयों में 86 फीसदी तक कम आ गई थी।
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