छत्‍तीसगढ़ में मायावती-अजीत जोगी गठबंधन: कांग्रेस चौतरफा घिरी, बीजेपी का क्‍या होगा, पढ़ें Analysis

नई दिल्‍ली। मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान करने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने छत्‍तीसगढ़ में भी कांग्रेस को झटका दे दिया है। मध्‍य प्रदेश की ही तरह छत्‍तीसगढ़ में भी कांग्रेस-बसपा गठबंधन विनिंग कॉम्बिनेशन साबित हो सकता था, लेकिन मायावती ने कांग्रेस की बजाय अजीत जोगी की पार्टी का हाथ थामना बेहतर समझा। राज्‍य की कुल 90 विधानसभा सीटों में से 35 पर बसपा लड़ेगी, जबकि 55 सीटों पर अजीत जोगी की जनता कांग्रेस चुनाव लड़ेगी। अजीत जोगी और मायावती के साथ आने से कांग्रेस को तो घाटा होगा ही, लेकिन बीजेपी के सामने भी चुनौती काफी कठिन हो चली है। राज्‍य में बीते 15 साल से रमन सिंह की सरकार है, पिछले यानी 2013 के चुनाव में बीजेपी हारते-हारते बची थी। ऐसे में मायावती का एक दांव बीजेपी और कांग्रेस दोनों पर भारी पड़ सकता है।

मायावती-जोगी के साथ आने से 10 आरक्षित सीटों पर पड़ेगा

मायावती-जोगी के साथ आने से 10 आरक्षित सीटों पर पड़ेगा

अजीत जोगी की पार्टी की मध्‍य छत्‍तीसगढ़ में अच्‍छी पकड़ रखती है। यहां की 10 आरक्षित सीटों में से इस समय 9 बीजेपी के पास हैं। इन सीटों पर सतनामी समुदाय का वर्चस्‍व है। इस समुदाय पर अजीत जोगी की अच्‍छी पकड़ मानी जाती है। मायावती का साथ मिलने की वजह से यहां बीजेपी को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। 90 सीटों वाली विधानसभा में अगर 10 सीटें एकमुश्‍त किसी एक दल या गठबंधन के पक्ष में चली जाएं, नतीजे बदल सकते हैं।

भितरघात से जूझ रही कांग्रेस को लगेगा तगड़ा झटका

भितरघात से जूझ रही कांग्रेस को लगेगा तगड़ा झटका

छत्‍तीसगढ़ ऐसा राज्‍य है, जहां कांग्रेस सत्‍ता के करीब आते-आते रह जाती है। ऐसा कई बार हो चुका है, इसके पीछे बड़ी वजह है भितरघात। कहानी की शुरुआत हुई थी 2003 में, जब भाजपा-कांग्रेस के बीच छत्‍तीसगढ़ में कांटे का मुकाबला हुआ था। 2003 विधानसभा चुनाव में दोनों दलों के बीच केवल 2.5 प्रतिशत वोटों का अंतर रहा। 2008 विधानसभा चुनाव में दोनों दल आमने-सामने आए, इस बार अंतर घटकर महज 1.7 फीसदी रह गया और 2013 में तो यह बिल्‍कुल मामूली हो गया। सिर्फ 0.75 प्रतिशत के अंतर से कांग्रेस चुनाव हार गई। 2016 में अजीत जोगी ने कांग्रेस से अलग होने का ऐलान कर दिया और नई पार्टी बना ली। ऐसे में कांग्रेस की ताकत काफी कम हो चुकी है।

रमन सिंह के लिए संजीवनी बनेगा गठबंधन या होगा नुकसान

रमन सिंह के लिए संजीवनी बनेगा गठबंधन या होगा नुकसान

मायावती और अजीत जोगी के साथ आने से कई नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। पहला तो यह कि कांग्रेस अब मुश्किल में घिर गई है। उसके पास अजीत जोगी या रमन सिंह की टक्‍कर का एक भी नेता राज्‍य में नहीं है। दूसरा सवाल यह उठ रहा है कि बीजेपी पर इस गठबंधन का क्‍या असर पड़ेगा। मायावती और अजीत जोगी के साथ आने से त्रिशंकु विधानसभा के आसार बढ़ रहे हैं। 90 सीटों वाली विधानसभा में तीन तरफा मुकाबला किसी एक प्रकार से सत्‍ताधारी पार्टी के लिए फायदेमंद भी हो सकता है, क्‍योंकि कांग्रेस, मायावती-अजीत जोगी गठबंधन एक-दूसरे के वोट काटेंगे। ऐसे में बीजेपी को लाभ भी मिल सकता है।

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