अमूल या नंदिनी ही नहीं हर राज्य का है अपना दूध ब्रांड, देखें दुग्ध उत्पादन के दिलचस्प आंकड़े
देश में हाल के दिनों में सहकारी दुग्ध उत्पादक संघों के बीच टकराव की स्थिति देखने को मिली है। कर्नाटक के बाद अब तमिलनाडु में विवाद खड़ा हो गया है।

कर्नाटक के बाद अब तमिलनाडु में अमूल के दूध की एंट्री को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने पीएम मोदी को पत्र लिखाकर अमूल को आविन के इलाके से दूध खरीदने से रोकने का अनुरोध किया है।
देश में हाल के दिनों में सहकारी दुग्ध उत्पादक संघों के बीच टकराव की स्थिति देखने को मिली है। इससे पहले कर्नाटक में क्षेत्रीय ब्रांड नंदिनी ने भी अमूल का विरोध किया था।
बता दें कि अमूल गुजरात की दुग्ध सहकारी संस्था है। जो राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक पहचाना जाने वाला मिल्क ब्रांड है। इसके बाद दिल्ली की मदर डेयरी आती है।

हर राज्य के पास है अपना क्षेत्रीय दूध का ब्रांड
देश के लगभग हर राज्य में अपना क्षेत्रीय दुग्ध ब्रांड है। दिल्ली में मदर डेयरी, जम्मू कश्मीर में स्नोकेप, पंजाब में वेरका, हरियाणा में विटा, हिमाचल में हिम, उत्तर प्रदेश में पराग, पारस, श्याम, नमस्ते इंडिया और सहज समेत कई ब्रांड हैं।
वहीं राजस्थान में सरस, मध्य प्रदेश में सांची, छत्तीसगढ़ में देवभोग, बिहार में सुधा, ओडिशा में ओमफेड, पश्चिम बंगाल में मिमूल और बेनमिल्क, असम में पुरबी, सिक्किम में कंचनजंगा और सिक्कीमिल्क, त्रिपुरा में गोमती, गुजरात में अमूल, गोवा में गोवा डेयरी, आंध्र और तेलंगाना में विजया, केरल में मिल्मा, कर्नाटक में नंदिनी, महाराष्ट्र में गोकुल, वरना, कटराज, नंदन, गोदावरी जैसे दूध के ब्रांड मौजूद हैं।

यूपी देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य है
बता दें कि, देश में उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा दूध उत्पादक राज्य है। यूपी का भारत में कुल दूध उत्पादन में 17% से ज्यादा हिस्सा है। लेकिन प्रति व्यक्ति खपत के मामले में काफी पीछे है। यूपी में 2020-21 में 318.630 लाख मीट्रिक टन दूध का उत्पादन हुआ है।

दूध सहकारिता क्या है?
दुग्ध सहकारी समितियाँ किसानों के स्वामित्व वाली और उनके द्वारा संचालित संस्थाएं हैं। जो अपने डेयरी उत्पादों के प्रसंस्करण, विपणन और वितरण के लिए मिलकर काम करती हैं। वे किसानों को सशक्त बनाने और उनकी उपज के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कर्नाटक और केरल के बीच भी है विवाद
मिल्मा (केरल) और नंदिनी (कर्नाटक) के बीच भी प्रतिद्वंद्विता देखने को मिलती रही है। मिल्मा ने केरल में नंदिनी के दूध की बिक्री का विरोध किया है। इसे अनैतिक बताया है। मिल्मा का कहना है कि, यह केरल के किसानों के हितों को नुकसान पहुंचा सकता है। केरल का कहना है कि सहकारी सिद्धांतों और भावना को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। जिसने वर्षों से भारत के डेयरी सेक्टर का बढ़ाया है।

जानें किस राज्य में कितनी है प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता
अगर भारत में प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता की बात करें तो मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय केआंकड़ों के मुताबिक, 2023 में प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता 592 ग्राम रही। हाल के सालों में इसमें इजाफा हुआ है। अगर राज्यवार प्रति व्यक्ति दूध की खपत देखें तो पंजाब पहले नंबर पर औऱ हरियाणा दूसरे स्थान पर है। पंजाब में प्रति दिन प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 1271 ग्राम है और हरियाणा में 1081 ग्राम प्रति व्यक्ति है।
इस मामले में राजस्थान तीसरे स्थान पर है। यूपी भले ही दूध के उत्पादन में देश में पहले स्थान पर आता हो लेकिन प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता बहुत कम है। यहां प्रति दिन प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 392 ग्राम है। देश में सबसे कम प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता लक्ष्यद्वीप में है। यहां पर 17 ग्राम प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता है। वहीं राजधानी दिल्ली की स्थिति भी कुछ बेहतर नहीं है। 2016-17 में प्रति व्यक्ति 40 ग्राम था, इसके बाद के आंकड़े सरकार द्वारा साधा नहीं किए गए हैं।
देखें राज्यवार प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता:
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