एमनेस्टी की पूर्व हेड ने आतंकियों का समर्थन करने पर संस्था को फटकारा
नई दिल्ली। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में पिछले दिनों एक कार्यक्रम के दौरान मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था के कर्मियों पर देश विरोधी नारे लगाने का आरोप लगा है। संस्था के कर्मियों के खिलाफ देशद्रोह का केस भी दर्ज
हो गया है।

जहां एक तरफ एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इन आरोपों से इंकार कर दिया है तो वहीं इसकी एक पूर्व प्रमुख गीता सहगल ने आतंकियों का समर्थन करने पर संस्था को फटकार लगाई है।
इंग्लिश डेली टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक संस्था की जेंडर यूनिट की हेड रही गीता ने हालांकि संस्था के कर्मियों पर लगे देशद्रोह के केस को भी गलत करार दिया है।
गीता के मुताबिक एमनेस्टी और दूसरे मानवाधिकार संगठनों की यह जिम्मेदारी है कि वह उन्हीं आदर्शों या फिर स्तर का प्रदर्शन करें जिनकी उम्मीद वह दूसरों से करते हैं। संस्थाओं को अपने काम में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करनी होगी।
गीता की मानें तो मानवाधिकारों के हनन की बात करने पर उन्हें खुद की ओर भी देखना चाहिए। गीता को एमनेस्टी ने वर्ष 2010 में आठ वर्षों के कार्यकाल के बाद सस्पेंड कर दिया था।
आपको बता दें कि बेंगलुरु के यूनाइटेड थियोलॉजिकल कॉलेज में 'ब्रोकेन फैमिलीज ऑफ कश्मीर' नामक एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में एक कश्मीरी पंडित नेता ने जब इंडियन आर्मी की वकालत की तो माहौल गर्मा गया।












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