अमिताभ को सताया अंधेपन का डर, कहा- चीजें अब दो-दो नजर आने लगी हैं और आंखों को...

अमिताभ बच्चन ने ब्लॉग लिखते हुए बताया, 'इन आंखों को अब तस्वीरें धुंधली नजर आती हैं...'

नई दिल्ली। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन अक्सर अपनी सोशल मीडिया पोस्ट्स को लेकर चर्चाओं में रहते हैं। फेसबुक और ट्विटर पर काफी एक्टिव रहने वाले अमिताभ अपनी लाइफ से जुड़ी बातें भी अपने फैंस के साथ शेयर करते रहते हैं। अमिताभ बच्चन ने अब एक ब्लॉग लिखा है, जिसे पढ़कर उनके फैंस को उनकी चिंता होने लगी है। दरअसल अपने इस ब्लॉग में अमिताभ बच्चन ने अपनी आंखों की रोशनी के बारे में लिखा है। अमिताभ ने लिखा है कि उनकी आंख में परेशानी अब बढ़ने लगी है और उन्हें अंधेपन का आभास होने लगा है। अमिताभ बच्चन इससे पहले भी अपनी एक फेसबुक पोस्ट में अपनी आंखों की परेशानी का जिक्र कर चुके हैं।

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    'आंखों को अब तस्वीरें धुंधली नजर आती हैं'

    'आंखों को अब तस्वीरें धुंधली नजर आती हैं'

    हाल ही में लिखे अपने इस ब्लॉग में अमिताभ बच्चन ने लिखा है, 'इन आंखों को अब तस्वीरें धुंधली नजर आती हैं...चीजें दो-दो नजर आने लगी हैं और अब पिछले कुछ दिनों से मैंने इस बात के साथ खुद को समझा लिया है कि अंधापन आ रहा है, और इसे उन सभी बीमारियों के साथ शामिल कर लिया है, जो पहले से मेरे साथ चल रही हैं।'

    'जब मां अपनी साड़ी के पल्लू का एक किनारा...'

    'जब मां अपनी साड़ी के पल्लू का एक किनारा...'

    अमिताभ बच्चन ने अपनी मां और बीते दिनों को याद करते हुए लिखा, 'लेकिन तब...आज उन शुरुआती दिनों की याद आती है, जब मां अपनी साड़ी के पल्लू का एक किनारा लेती थी, उसकी एक नर्म गोल गेंद बनाती थी, उस गर्म करने के लिए उसमें फूंक मारती थी और फिर उसे मेरी आंखों पर रख देती थी...और समस्या खत्म।'

    'आंखें थक गईं थी'

    'आंखें थक गईं थी'

    अपने ब्लॉग में अमिताभ ने आगे लिखा, 'तो उसके बाद...गर्म पानी, एक तौलिया और इसे आंखों पर रख दिया...डॉक्टर से बात की और उनके निर्देशों को मानते हुए, उनकी बताई हुई आई ड्रोप हर घंटे अपनी आंख में डाली। डॉक्टर ने मुझे आश्वस्त किया कि अंधापन नहीं आ रहा है...उन्होंने कहा कि कंप्यूटर की स्क्रीन के सामने आप बहुत ज्यादा टाइम बिता रहे हैं...आंखें थक गईं थी...बस। और हां...मां की पुरानी तकनीक ने काम किया...। हां...अब मैं देख सकता हूं।'

    'एक काला धब्बा आंख के अंदर'

    'एक काला धब्बा आंख के अंदर'

    आपको बता दें कि दो महीने पहले भी अमिताभ बच्चन ने अपनी फेसबुक पोस्ट में अपनी आखों की परेशानी का जिक्र किया था। अमिताभ ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, 'बायीं आंख फड़कने लगी; सुना था बचपन में अशुभ होता है; गए दिखाने डॉक्टर को, तो निकला ये एक काला धब्बा आंख के अंदर, डॉक्टर बोला-कुछ नहीं है, उम्र की वजह से, जो सफेद हिस्सा आंख का होता है, वो घिस गया है। जैसे बचपन में मां अपने पल्लू को गोल बनाकर, फूंक मारकर, गरम करके आंख में लगा देतीं थी, वैसा करो, सब ठीक हो जाएगा। मां तो हैं नहीं अब, बिजली से रुमाल को गरम करके लगा लिया है। पर बात कुछ बनी नहीं!! मां का पल्लू , मां का पल्लू होता है!!'

    'शरीर अब काम करने की इजाजत नहीं दे रहा'

    'शरीर अब काम करने की इजाजत नहीं दे रहा'

    अमिताभ बच्चन अक्सर अपने फैंस के साथ अपने जीवन से जुड़ी बातें शेयर करते रहते हैं। इससे पहले उन्होंने एक ब्लॉग लिखते हुए कहा था, 'अब मुझे रिटायर हो जाना चाहिए। मेरा शरीर अब काम करने की इजाजत नहीं दे रहा है। दिमाग जो सोच रहा है, उंगली वो नहीं लिख रही हैं। अगर उंगलियां दिमाग के इशारे पर ना चलें तो ये आपको एक संदेश है कि रिटायर हो जाइए, मुझे भी रिटायर हो जाना चाहिए।' गौरतलब है कि मिताभ बच्चन सिनेमा जगत में 50 साल पूरे कर चुके हैं लेकिन अभी भी वे फिल्मों में काम कर रहे हैं।

    'जिंदगी कभी हार नहीं मानती'

    'जिंदगी कभी हार नहीं मानती'

    पिछले दिनों जब डॉक्टर ने उन्हें काम ना करने की सलाह दी, तो अमिताभ बच्चन ने एक ब्लॉग में लिखा था, 'जिंदगी कभी हार नहीं मानती है और ये आसानी से हार ना मानने की अपील भी करती है, यही जिंदगी की खूबसूरती है। एक इंसान को हर रोज संघर्ष का सामना करना पड़ता है। धूल, गंदगी, बारिश, मिट्टी और गर्मी... इन मुश्किलों के बावजूद वह जीवित रहने के लिए अपने संघर्ष को जारी रखती है क्योंकि जिंदगी एक अनवरत मरम्मत का काम है।'

    'आगे क्या होगा और किन हालात का सामना करना पड़ेगा'

    'आगे क्या होगा और किन हालात का सामना करना पड़ेगा'

    अमिताभ ने आगे कहा, 'हर रोज के शुरू होते ही इस बात की उम्मीद रहती है कि आगे क्या होगा और किन हालात का सामना करना पड़ेगा, जो भी है उसके बारे में मालूम नहीं है। इससे उबरने या इसे स्वीकार करने को लेकर क्या स्थिति है, अंतत: नतीजा निकलता है कि ये निरंतर एक जारी रहने वाला काम था और किसी को ये करना ही था, क्योंकि इसे मरम्मत की जरूरत है।'

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