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अमिताभ बच्चन ने बाला साहब को बताया अपनी 'लाइफ का हीरो', खोले वो राज जो अब तक सीने में दफन थे

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    नई दिल्ली। सिने अभिनेता अमिताभ बच्चन और शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे की नजदीकियां किसी से छुपी नहीं हैं, उनके निधन के वक्त (साल 2012) में अमिताभ का उतरा हुआ चेहरा उनेक दिल के दर्द को बखूबी बयान कर रहा था। एक बार फिर से सिने अभिनेता ने अपनी तरह से बाल ठाकरे को याद किया है और इस दौरान उन्होंने अपने जीवन के राज भी खोले हैं, वो राज जो अब तक केवल उनके और ठाकरे के बीच में थे। दरअसल हाल ही में बाल ठाकरे की बायोपिक फिल्म 'ठाकरे' का फर्स्ट लुक रिलीज किया गया, जिसका अनावरण अमिताभ बच्चन के ही हाथों हुआ। जहां बाल ठाकरे की फोटो देखकर अमिताभ अपने यादों की दुनिया में खो गए, अमिताभ ने शिवसेना के संस्थापक को दिल से याद करते हुए कहा कि मैं बाला साहब को कभी नहीं भूल सकता, वो मेरी लाइफ के सबसे बड़े हीरो थे, मेरे लिए पिता तुल्य थे, उन्होंने तब मेरी मदद की, जब मैं और मेरा परिवार आरोपों और बदनामी से घिरा हुआ था।

    बोफोर्स मामला

    बोफोर्स मामला

    मेरा नाम बोफोर्स मामले में आया था, मैं मानसिक रूप से बहुत परेशान था कि तभी बाला साहब ने मुझे बुलाया और कहा कि अमिताभ मैं तुम्हारे मुंह से केवल सच सुनना चाहता हूं, तब मैंने उन्हें अपनी सारी सच्चाई बताई और कहा कि मैंने कुछ गलत नहीं किया है, सारी बातें निराधार हैं।

    बस मैं यही सुनना चाहता था...

    बस मैं यही सुनना चाहता था...

    तब ठाकरे ने मुझसे कहा कि बस मैं यही सुनना चाहता था, अब तुम घर जाओ और थोड़े दिन घर से बाहर ना निकलना, कुछ वक्त बाद सब सही हो जाएगा, मैं खुद तुम्हारे साथ चलूंगा और तुम सिर उठाकर चलना। मेरे लिए उनके वो शब्द बेहद अनमोल थे, क्योंकि उन्होंने मुझे सच की ताकत से रूबरू कराया था।

    शिवसेना की एंबुलेंस

    शिवसेना की एंबुलेंस

    अपनी यादों के पिटारे से अमिताभ ने एक और टचिंग किस्सा निकाला, उन्होंने बताया कि जब मैं 'कुली' फिल्म की शूटिंग के दौरान घायल हो गया था, उस वक्त बहुत तेज बारिश हो रही थी, एक भी एंबुलेंस उस वक्त मिल नहीं रही थी। मैं दर्द से चिल्ला रहा था, तब भी ठाकरे साहब ने मेरी मदद की थी, उनके कहने पर मुझे शिवसेना की एंबुलेंस ने अस्पताल पहुंचाया था। मैं उन्हें कभी नहीं भूल सकता।

    कार्टूनिस्‍ट के रूप में काम किया...

    कार्टूनिस्‍ट के रूप में काम किया...

    आपको बता दें कि बाल ठाकरे का जन्‍म एक साधारण से मराठी कायस्‍थ परिवार में 23 जनवरी 1926 में हुआ। पढ़ाई पूरी करते-करते उन्‍होंने समाज सेवा में कदम रखा और पिछड़ों के लिये जंग लड़नी शुरू की। 1950 के दशक में उन्‍होंने मुंबई में एक अखबार फ्री प्रेस जनरल में एक कार्टूनिस्‍ट के रूप में शुरू किया।

     कलाकार के रूप में भी जनता के सामने दिखे

    कलाकार के रूप में भी जनता के सामने दिखे

    उसके बाद उन्‍होंने लेख लिखने शुरू किये। 1960 में उन्‍होंने अपनी पत्रिका मार्मिक लॉन्‍च की। यह एक कार्टून वीकली था। उन्‍होंने इसका इस्‍तेमाल तमाम अभियानों में किया। ठाकरे ने अपने जीवन में कई नाटकों का मंचन भी किया। वह एक कलाकार के रूप में भी जनता के सामने दिखे।

     19 जून 1966

    19 जून 1966

    देखते ही देखते ठाकरे राजनीति से जुड़ गये और 19 जून 1966 को उन्‍होंने शिवसेना की स्‍थापना की। उन्‍होंने शिवाजी पार्क में अपनी पहली रैली का आयोजन इसी दिन किया। उन्‍होंने अपनी जंग की शुरुआत गैर मराठियों के खिलाफ की। शिवसेना के कार्यकर्ताओं को सैनिक का दर्जा दिया और अपनी सेना के साथ उन्‍होंने तमाम अभियान चलाये।

    कलाकारों के साथ उनके रिश्‍ते काफी करीबी

    कलाकारों के साथ उनके रिश्‍ते काफी करीबी

    बाला साहब हमेशा से बॉलीवुड के करीब रहे। अमिताभ बच्‍चन से लेकर तमाम कलाकारों के साथ उनके रिश्‍ते काफी करीबी रहे। वो लता मंगेशकर के भी बहुत बड़े फैन थे।

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    English summary
    Bollywood icon Amitabh Bachchan had shared close ties with Bal Thackeray, one of the most enigmatic politicians who had millions of devoted followers and once controlled Mumbai.

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