अमित शाह राजनीति से रिटायरमेंट के बाद क्या करेंगे? खुद बताया अपना प्लान, सुनने वाले भी रह गए दंग
Amit Shah Retirement Plans: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार (09 जुलाई) को अहमदाबाद में आयोजित 'सहकार संवाद' कार्यक्रम में बताया है कि वे राजनीति से रिटायरमेंट के बाद भविष्य में क्या करेंगे? उन्होंने कहा कि जब वे सार्वजनिक जीवन से संन्यास लेंगे, तो अपना पूरा समय वेद, उपनिषदों के अध्ययन और प्राकृतिक (ऑर्गेनिक) खेती को देंगे।
अमित शाह ने कहा, ''मैने तय किया है कि मैं जब भी रिटायर हो जाऊंगा, वेद, उपनिषद् और प्राकृतिक खेती के लिए अपना जीवन खर्च करूंगा। प्राकृतिक खेती एक तरीके का वैज्ञानिक प्रयोग है।'' अमित शाह के इस बयान के बाद ये चर्चा होने लगी कि क्या वे रिटायरमेंट की योजना बना रहे हैं तो बता दें कि ऐसा कुछ नहीं है। अमित शाह ने बस ये बताया है कि जब वह राजनीति से रिटायरमेंट लेंगे तो आगे क्या करेंगे।

अमित शाह बोले- प्राकृतिक खेती ही मेरा अगला जीवन है
अमित शाह ने कहा कि प्राकृतिक खेती कोई ढकोसला नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक पद्धति है, जो न केवल सेहत के लिए बेहतर है, बल्कि पर्यावरण की भी रक्षा करती है। उन्होंने कहा कि रासायनिक खाद से उगाया गया गेहूं और अन्य अनाज ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, थायरॉयड, यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की वजह बन सकते हैं।
अमित शाह ने कहा, "प्राकृतिक खेती से शरीर स्वस्थ रहता है और दवाइयों की जरूरत कम हो जाती है।'' उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने खेतों में प्राकृतिक तरीके से खेती शुरू कर दी है और उत्पादन 1.5 गुना बढ़ गया है।
'रिटायरमेंट के बाद पूरा समय वेद, उपनिषदों को दूंगा'
अमित शाह ने यह भी कहा कि रिटायरमेंट के बाद वे अपना पूरा समय वेद और उपनिषदों को देंगे। उन्होंने कहा कि वह उस दौरान वेद और उपनिषद और पढ़ेंगे। अमित शाह का यह बयान न सिर्फ उनके आध्यात्मिक झुकाव को दिखाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वे रिटायरमेंट के बाद भी समाज और खेती से जुड़े रहना चाहते हैं।
अमित शाह ने यह भी कहा कि जब उन्हें गृह मंत्री बनाया गया तो सभी ने इसे सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालय माना। लेकिन जब उन्हें सहकारिता मंत्रालय मिला, तो उन्होंने महसूस किया कि यह मंत्रालय किसानों, गरीबों, गांवों और पशुधन के लिए सबसे ज्यादा काम करता है। उन्होंने कहा,"मेरे लिए सहकारिता मंत्रालय गृह मंत्रालय से भी बड़ा है, क्योंकि यह आम लोगों के जीवन को सीधे प्रभावित करता है।"
अमित शाह ने हाल ही में त्रिभुवन सहकारिता विश्वविद्यालय की नींव भी रखी, जो त्रिभुवन काका को समर्पित है। शाह ने बताया कि त्रिभुवन काका ने भारत में सहकारी आंदोलन की सच्ची नींव रखी, जिससे आज गुजरात की महिलाएं ₹80,000 करोड़ तक का व्यापार कर रही हैं। अमित शाह ने कहा, "कांग्रेस ने संसद में त्रिभुवन काका के नाम का विरोध किया, लेकिन मैंने फैसला लिया कि विश्वविद्यालय उन्हीं के नाम से बनेगा।"
अमित शाह ने युवाओं को दी 2 खास सलाह
कुछ समय पहले विश्व लिवर दिवस के अवसर पर अमित शाह ने अपनी स्वास्थ्य यात्रा के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मई 2019 से लेकर अब तक उन्हें एक भी एलोपैथिक दवा की जरूरत नहीं पड़ी। इसका श्रेय वे अपने संतुलित खानपान, साफ पानी, नियमित व्यायाम और अच्छी नींद को देते हैं।
युवाओं के लिए अमित शाह की 2 खास सलाह दी थी। पहली, रोज कम से कम 2 घंटे का व्यायाम करें। दूसरी, हर रात 6 घंटे की अच्छी नींद लें।












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