Amit Shah Caste Religion: बंगाल में BJP की जीत के मास्टरमाइंड अमित शाह की जाति क्या है? धर्म पर उठे थे सवाल
Amit Shah Caste Religion: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जबरदस्त जीत के बाद अमित शाह खूब चर्चा में हैं। बंगाल चुनाव को लेकर उनकी प्लानिंग और ज़मीन पर पकड़ इस जीत की बड़ी वजह रही। शाह ने तो नवंबर 2025 में ही, बिहार चुनाव से पहले, बंगाल पर काम शुरू कर दिया था। दिल्ली में लगातार मीटिंग्स हुईं और पूरी रणनीति पहले से सेट कर ली गई।
सितंबर 2025 तक भूपेंद्र यादव को चुनाव प्रभारी और बिप्लब कुमार देब को सह-प्रभारी बना दिया गया, ताकि संगठन मजबूत हो और ग्राउंड पर पकड़ बढ़े।

पश्चिम बंगाल में अमित शाह ने पारंपरिक जातीय राजनीति की बजाय स्मार्ट "सोशल इंजीनियरिंग" अपनाई। उन्होंने मतुआ, राजबंशी और SC/ST जैसे खास समुदायों पर फोकस करते हुए उनके मुद्दों के हिसाब से कैंपेन चलाया, साथ ही "हिंदू एकजुटता" जैसे बड़े नैरेटिव के जरिए अलग-अलग जातियों को जोड़ने की कोशिश की। इसके साथ डेटा-आधारित माइक्रो प्लानिंग और बूथ स्तर पर रणनीति बनाकर हर इलाके में स्थानीय समीकरण साधे गए, जिससे बीजेपी को व्यापक समर्थन जुटाने में मदद मिली। आइए जानते हैं बंगाल में भगवा लहराने वाले अमित शाह की जाति क्या है?

Amit Shah Caste: अमित शाह की जाति क्या है?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पूरा नाम अमित अनिलचंद्र शाह है। गुजरात के एक हिंदू वैश्य (बनिया) परिवार से ताल्लुक रखते हैं। अमित शाह गुजरात के गांधीनगर के मानसा से आते हैं और उनके परिवार का गुजरात में एक स्थापित व्यापारिक इतिहास रहा है। अमित शाह ने स्वयं स्पष्ट किया है कि वे हिंदू वैष्णव हैं।
Amit Shah Religion: 'अमित शाह जैन हैं' धर्म पर क्यों उठा था सवाल?
दरअसल, 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनावों से पहले, कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने 19 मार्च को लिंगायतों और वीरशैव लिंगायतों को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देने के लिए केंद्र से सिफारिश करने का निर्णय लिया था। तब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शाह को 'अहिन्दु' (गैर-हिंदू) नेता बताते हुए पलटवार किया था। मैसूरु में उन्होंने कहा था "अमित शाह जैन हैं। उन्हें पहले यह स्पष्ट करना होगा कि वे हिंदू हैं या नहीं। जैन एक अलग धर्म है। वे मेरे बारे में इस तरह कैसे बात कर सकते हैं?"
अमित शाह ने खुद बताई थी अपनी जाति
जिसका जवाब देते हुए भाजपा के 38वें स्थापना दिवस पर एक रैली के बाद मीडिया से बातचीत में शाह ने यह स्पष्ट किया था कि मैं 'हिंदू वैष्णव'हूं। उन्होंने कर्नाटक सरकार के लिंगायतों को अलग धर्म का दर्जा देने के कदम को 'हिंदुओं को बांटने की कोशिश' करार दिया। शाह ने यह भी आरोप लगाया कि 2013 में यूपीए सरकार द्वारा खारिज की गई यह सिफारिश सिर्फ बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए उठाया गया 'चुनावी हथकंडा' है।














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