पांच राज्यों में चुनाव के बीच वरुण गांधी लेकर आए हैं खुद का मैनिफेस्टो

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के सांसद और वरिष्ठ नेता वरुण गांधी अक्सर पार्टी से जुदा राय रखने के लिए चर्चा में रहते हैं। कई ऐसे मौके आए हैं जब वरुण गांधी ने अपनी ही सरकार और पार्टी के लिए अपने बयान से मुश्किल खड़ी कर दी है। यही वजह है कि उन्हें पार्टी चुनाव प्रचार से दूर रखती है। एक तरफ जहां पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं और भाजपा ने तमाम राज्यों के लिए अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी किया है, लेकिन इन सबके बीच वरुण गांधी ने भी अपना एक घोषणा पत्र जारी किया है , जिसकी वजह से वह चर्चा में आ गए हैं।

किसानों को ध्यान में रखा गया

किसानों को ध्यान में रखा गया

वरुण गांधी ने अलग से अपना एक रूरल मैनिफेस्टो जारी किया है जोकि मुख्य रुप से ग्रामीणों और किसानों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया या है। इस मैनिफेस्टो की खास बात यह है कि इसे एक किताब के रूप में जारी किया गया है। वरुण गांधी के करीबियों की मानें तो पंडित जवाहर लाल नेहरू के बाद वरुण गांधी एकमात्र गांधी परिवार में ऐसे सदस्य हैं जिन्होंने कोई किताब लिखी है। बहरहाल वरुण गांधी अपनी इस किताब को लेकर चर्चा में हैं, जिसने खुद उनकी ही पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। वरुण गांधी की यह किताब औपचारिक रूप से 30 नवंबर को आईआईएम अहमदाबाद में जारी होगी, इसके बाद इसे देश के अलग-अलग हिस्सों में 11 जगहों पर जारी किया जाएगा।

किसानों की समस्या पर ध्यान देने की जरूरत

किसानों की समस्या पर ध्यान देने की जरूरत

किसानों के कर्ज को माफ किए जाने के मुद्दे पर वरुण गांधी कहते हैं कि यह किसानों की जरूरत है इसपर सरकारों को ध्यान देना चाहिए। यहां गौर करने वाली बात यह है कि देश के जि भी राज्य में चुनाव हुआ है भाजपा ने वहां वायदा किया है कि वह किसानों का कर्ज माफ करेगी। वरुण ने केरल सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि कर्जमाफी को लेकर लेफ्ट सरकार की नीतियां बेहतर हैं। यही नहीं उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए मनरेगा को और भी मजबूत करने की जरूरत है और इसे अधिक फंड देने की जरूरत है।

कमतर नहीं आंका जा सकता है

कमतर नहीं आंका जा सकता है

वरुण गांधी ने कहा कि आगला लोकसभा चुनाव निश्चित तौर पर किसानों के मुद्दे पर आधारित होगा। हालांकि किसानों की हालत पर हो रही राजनीति पर वरुण ने कुछ भी कहने से इनकार किया लेकिन उन्होंने साफ किया कि जब किसान आत्महत्या करता है और उसे उसकी फसल की सही कीमत नहीं मिलती है तो इसका असर देश की सियासत पर जरूर होता है। उन्होंने चेताते हुए कहा कि किसी भी दल को किसानों की ताकत को कम नहीं समझना चाहिए।

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