म्यांमार से मणिपुर आने वाले शरणार्थियों का लिया जाएगा बायोमीट्रिक डेटा

मणिपुर में जिस तरह से हालात तनावपूर्ण हैं उसके बाद सरकार यहां के हालात को नियंत्रित करने की हर संभव कोशिश कर रही है। जिस तरह से हाल ही में खबर सामने आई है कि मणिपुर में म्यांमार के कई लोग प्रवेश कर गए हैं, उसके बाद सरकार ने फैसला लिया है कि मणिपुर में म्यांमार से आने वाले लोगों का बायोमीट्रिक डेटा लिया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार इस कदम से सरकार मणिपुर में आने वाले लोगों की आसानी से पहचान कर सकती है, यहां यह बात साफ की गई है कि इन लोगों कि इन लोगों को निगेटिव बायोमीट्रिक लिस्ट में रखा जाएगा ताकि ये बाद में भारत के नागरिक ना बन सके।

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इसके साथ ही इंडो-म्यांमार सीमा पर फेंसिंग यानि तार लगाने की भी तैयारी की जा रही है। अभी तक 10 किलोमीटर सीमा पर तार लगाने का काम पूरा किया जा चुका है। जिस एजेंसी को यह काम सौंपा गया है उसे निर्देश दिया गया है कि वह इसे जल्द से जल्द पूरा कर करे।

दरअसल पिछले कई महीनों ने मणिपुर में मैतेई और कूकी समुदाय के बीच हालात काफी तनावपूर्ण चल रहे हैं। मैतेई समुदाय के लोगों का आरोप है कि कूकी शरणार्थी गैरकानूनी तरीके से म्यांमार से आकर मणिपुर के जंगलों में कब्जा कर रहे हैं।

कई संगठनों ने दिल्ली के जंतर मंतर पर मार्च में इसको लेकर प्रदर्शन किया था और मांग की थी कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजेन को यहां लागू किया जाए और आधार वर्ष 1951 रखा जाए।

कुछ दिन पहले मणिपुर सरकार ने कहा था कि 700 से अधिक गैरकानूनी शरणार्थी म्यांमार से मणिपुर में आए हैं। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की सरकार की ओर से कहा गया था कि शरणार्थियों की घुसपैठ के मामले को अति संवेदनशील तरीके से निपटा जाएगा।

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