AUKUS: US, UK और ऑस्ट्रेलिया के गठबंधन का हिस्सा बनेगा भारत? व्हाइट हाउस ने बताया

नई दिल्ली, 23 सितम्बर। संयुक्त राज्य अमेरिका ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर हुए ऑकस समझौते में भारत या जापान को जोड़ने से इनकार किया है। 15 सितम्बर को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने त्रिपक्षीय सुरक्षा गठबंधन की घोषणा की थी जिसे ऑकस (AUKUS) नाम दिया गया था। इस समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया को परमाणु पनडुब्बियों का एक बेड़ा मिलेगा। ब्रिटेन के बाद ऑस्ट्रेलिया दूसरा देश बना है जिससे अमेरिका यह तकनीक साझा कर रहा है।

Narendra Modi

उम्मीद जताई जा रही थी कि इंडो पैसिफिक क्षेत्र के महत्व को देखते हुए भारत और जापान को भी इसमें शामिल किया जा सकता है लेकिन अमेरिका ने साफ किया है कि इसकी कोई संभावना नहीं है।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने बुधवार को प्रेस से बातचीत में कहा "पिछले सप्ताह ऑकस की घोषणा इस बात का संकेत नहीं है कि इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा को लेकर हुए इस समझौते में कोई और भी शामिल होगा।"

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    गठबंधन से भड़का फ्रांस
    फ्रांस ने गठबंधन की आलोचना करते हुए कहा था कि ऐसे समय में जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आम चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है यह गठबंधन सुसंगतता की कमी को दर्शाता है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान साकी से सवाल किया गया था कि क्या भारत और जापान जैसे देश, जिनके नेता क्वाड शिखर सम्मेलन के लिए अमेरिका में होंगे , को इस सुरक्षा गठबंधन का हिस्सा बनाया जाएगा। क्वाड इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर चार देशों का समूह है जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।

    अमेरिका 24 सितंबर को वाशिंगटन में व्यक्तिगत रूप से क्वाड शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।

    प्रेस सचिव से पत्रकार ने पूछा था सवाल
    एक पत्रकार ने पूछा "शुक्रवार को आपके पास आस्ट्रेलिया के नेता होंगे लेकिन इस दौरान भारत और जापान भी होंगे। क्या आप उनके लिए भी उसी तरह की सैन्य भूमिका की कल्पना करेंगे जो आपने आस्ट्रेलिया के साथ 'ऑकस' के रूप में स्थापित की है। यह क्या होगा ? जेऑकस (JAUKUS)? या फिर जयऑकस (JAIAUKUS)?"

    ऑकस के रूप में हुए त्रिपक्षीय सुरक्षा गठबंधन को इंडो-पैसिफिक में चीन की बढ़ती ताकत का मुकाबला करने के रूप में देखा जा रहा है। इस समझौते के तहत अमेरिका और ब्रिटेन परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियों को विकसित करने के लिए ऑस्ट्रेलिया को तकनीक उपलब्ध कराएंगे। चीन ने त्रिपक्षीय गठबंधन की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि यह क्षेत्रीय स्थिरका को गंभीर रूप से कमजोर करेगा और हथियारों की होड़ को बढ़ाएगा। चीन ने यह भी कहा कि इस तरह के समूहों का कोई भविष्य नहीं है।

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