अमेरिका के पूर्व सीनेटर बोले, पाक ने भारत के खिलाफ आतंक को बढ़ावा दिया
प्रेसलर ने पाकिस्तान को दिए जाने वाले आर्थिक मदद को बंद करने पर विचार करने की बात कही है साथ ही अमेरिका को कट्टपंथ से लड़ने के लिए भारत के साथ मिलकर एक संगठन बनाने पर जोर दिया है।
नई दिल्ली। आतंकवाद से लड़ाई के नाम पर पाकिस्तान की मदद करने वाला अमेरिका अब पाकिस्तान के कारनामों को दुनिया के सामने लाना चाहता है। यूएस एक्सपर्टस का मानना है कि पाकिस्तान तालिबान, हक्कानी नेटवर्क और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी समूहो को समर्थन दे रहा है और भारत को कमजोर करना चाहता है। रिपब्लिक पार्टी के पूर्व सेनेटर का मानना है कि अमेरिका को पाकिस्तान के साथ उत्तर कोरिया जैसा व्यवहार करना चाहिए।

साउथ डकोटा के पूर्व अमेरिकी सेनेटर लेरी प्रेसलर ने अपनी किताब 'नेबर्स इन आर्म्स: एन अमेरिकन सीनेटर्स क्वेस्ट फॉर डिसआर्ममेंट इन न्यूक्लियर सब कॉन्टिनेंट' में लिखा है,'आतंकवाद को लेकर अगर पाकिस्तान अपने तरीकों में बदलाव नहीं करता है तो उसे आतंकी देश घोषित कर देना चाहिए। मेरे अलावा विदेश नीति के कई अग्रणी विशेषज्ञों ने भी जोर देकर यह बात कही है। बुश प्रशासन ने भी अपने पहले कार्यकाल में वर्ष 1992 में इस बारे में गंभीरता से विचार किया था।'
प्रेसलर ने पाकिस्तान को दिए जाने वाले आर्थिक मदद को बंद करने पर विचार करने की बात कही है साथ ही अमेरिका को कट्टपंथ से लड़ने के लिए भारत के साथ मिलकर एक संगठन बनाने पर जोर दिया है।
ऑनलाइन पोर्टल 'द साइफर ब्रीफ' के मुताबिक पाकिस्तान में अमेरिका के राजदूत रह चुके विलियम मिलाम और ओबामा प्रशासन में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में दक्षिण एशिया के वरिष्ठ निदेशक रह चुके फिलिप रेनर ने कहा कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई आतंकवादी समूहों को लगातार सुरक्षा और सहायता दे रही है।
इस पोर्टल ने गुरुवार को ऐसे साक्षात्कार और आलेख डाले जिसमें इंटर सवर्सिेज इंटेलिजेंस के दोहरे चरित्र का खुलासा किया गया था। मिलान ने पोर्टल को बताया कि पाकिस्तान की 'शांतिपूर्ण अफगानिस्तान में कोई दिलचस्पी नहीं है जो उसके पक्के दुश्मन भारत के प्रभाव में होगा।'
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