मेघालय के राज्यपाल पर आरोप- सिर्फ लड़कियों को दी नौकरी, सीधे बेडरूम में आती थीं महिलाएं
मेघालय राजभवन की सुरक्षा को खतरा बताते हुए कर्मचारियों ने कहा कि राज्यपाल के आदेश पर महिलाएं सीधे अंदर चली जाती हैं। राजभवन यंग लेडीज क्लब बन गया है।
शिलॉन्ग। मेघालय के राजभवन में महिलाओं के यौन उत्पीड़न का आरोप सामने आने और 100 कर्मचारियों की ओर से शिकायत किए जाने के बाद राज्यपाल वी. शानमुगनाथन ने गुरुवार रात इस्तीफा दे दिया। उन पर राजभवन की मर्यादा से तोड़ने और उसे 'यंग लेडीज क्लब' में तब्दील करने का आरोप लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति भवन को लिखी गई पांच पेज की चिट्ठी में राज्यपाल की हर एक गतिविधि का जिक्र किया गया है। राज्यपाल के खिलाफ जो पत्र लिखा गया था उसमें उन पर ये गंभीर आरोप लगाए गए हैं-

1. राजभवन बन गया है यंग लेडीज क्लब

2. पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम को लेकर भी बोला था झूठ

3. प्रधान सचिव को रात भर डांटा था, जवान लड़कियों को आसपास रखा
चिट्ठी में कर्मचारियों ने कहा कि राज्यपाल ने अपने प्रधान सचिव को सारी रात सिर्फ इसलिए डांटा था क्योंकि वह उनकी गलत हरकतों में साथ नहीं दे रहे थे। राज्यपाल के प्रधान सचिव को हटाए जाने के बाद उन्होंने वीवीआईपी डाइनिंग रूम को ऑफिस में तब्दील कर दिया और एक अन्य सचिव को वहां बैठने के लिए कहा। उन्होंने राज्यपाल सचिवालय के कर्मचारियों को भी इधर से उधर किया और अपने काम के लिए सिर्फ जवान लड़कियों को ही रखा। राज्यपाल ने अपने निजी सचिव को भी ट्रांसफर कर दिया। जिस व्यक्ति को राज्यपाल का नया सचिव नियुक्त किया गया उन्होंने ऑफिस के काम में जरा भी दिलचस्पी नहीं ली और कभी-कभी ऑफिस आते थे। जब कुछ महिला कर्मचारियों ने सेक्रेटरी से राज्यपाल के व्यवहार की शिकायत की तो उन्होंने उस पर ध्यान नहीं दिया।

4. 'राज्यपाल की वजह से डिप्टी सेक्रेटरी को पड़ा दौरा'
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने राजभवन के स्टाफ को न सिर्फ अपमानित किया बल्कि मानसिक तौर पर टॉर्चर भी किया। हालत यह थी कि राज्यपाल के इस व्यवहार की वजह से सचिवालय के डिप्टी सेक्रेटरी को 28 अक्टूबर 2016 को ऑफिस में ब्रेन स्ट्रोक आ गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां चार दिन बाद उनकी सांसें थम गईं। हैरानी की बात यह है कि जब डिप्टी सेक्रेटरी जिंदगी मौत से जूझ रहे थे उसके अगले ही दिन राज्यपाल ने एक लंच पार्टी का आयोजन किया था। इसमें ज्यादातर कर्मचारियों ने हिस्सा नहीं लिया था। डिप्टी सेक्रेटरी की मौत के बाद जब राज्यपाल अस्पताल पहुंचे तो दुख जताने के बजाय फोटो सेशन में व्यस्त रहे।

5. राजभवन के स्टाफ पर नहीं था किया भरोसा
राज्यपाल ने राजभवन के कर्मचारियों पर भरोसा नहीं किया और असम राइफल्स के तीन जवानों की नियुक्ति कर ली। ये जवान किचेन, गार्डन और ऑफिस में मौजूद रहते थे, जबकि राजभवन के पास इस सब के लिए अलग से स्टाफ है। इससे स्पष्ट होता है कि उनका राजभवन के कर्मचारियों पर भरोसा नहीं है। राजभवन के इस स्टाफ ने कई गवर्नर के कार्यकाल में काम किया है और किसी ने कभी कोई शिकायत नहीं की। राजभवन में राज्यपाल के सेक्रेटरी के न रहने और डिप्टी सेक्रेटरी का पद खाली होने की वजह से राज्यपाल के ADC बेकाबू हो गए हैं और कर्मचारियों को धौंस दिखाते हैं। अडंर सेक्रेटरी को यह काम संभालना चाहिए लेकिन उन्हें पहले ही हटा दिया गया।

6. सीधे राज्यपाल के बेडरूम जाती हैं कई महिलाएं
मेघालय राजभवन की सुरक्षा को खतरा बताते हुए कर्मचारियों ने कहा कि राज्यपाल के आदेश पर महिलाएं सीधे अंदर चली जाती हैं। राजभवन यंग लेडीज क्लब बन गया है। यह सभी बखूबी जानते हैं कि कई महिलाएं सीधे राज्यपाल के बेडरूम में जाती हैं। राज्यपाल की हरकतों के बारे में उनके एडीसी को पता है लेकिन वे सभी खामोश हैं। राज्यपाल के आदेश पर कुछ महिलाओं को राजभवन में नियुक्त भी किया गया है। इनमें-
- चेन्नई की एक महिला को निजी कुक रखा गया है।
- असम की युवती को पहले पीए की पोस्ट पर रखा गया था फिर उसे पीआरओ बना दिया गया।
- इन दोनों कर्मचारियों को राज्यपाल के कहने पर सैलरी के अलावा रहना, खाना, कपड़े धुलने की सर्विस, सफाई का सामान, गाड़ी और राजभवन में रहने की सुविधा भी दी जा रही है। जबकि नियमों के मुताबिक उन्हें ये सुविधाएं नहीं मिलनी चाहिए।
- जिस युवती को पीआरओ बनाया गया है उसके रिश्तेदार और दो दोस्त जिनमें से ज्यादातर जवान लड़कियां हैं उन्हें भी यही सुविधाएं दी जाती हैं।
- राजभवन स्थायी मेडिकल सेटअप है जिसमें एक डॉक्टर और दो सहायक तैनात हैं उसके बावजूद राज्यपाल ने एक नर्स की नियुक्ति की। उन्होंने हाल ही में नाइट ड्यूटी के लिए एक प्राइवेट नर्स की भी नियुक्ति की है।

7. ऑफिस के बजाय बेडरूम से काम करती है PRO
15 से 25 अक्टूबर 2016 के बीच एक महिला राजभवन में ठहरी थी, जिसे नर्स बताया गया था। उसे सारी वीवीआईपी सुविधाएं दी गईं और एक दिन वह राज्यपाल पर रात में दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए चली गई। इसके बाद कई लेडी नर्स राजभवन में रात के समय रुकीं। गौर करने वाली बात ये है कि राज्यपाल कहीं के भी दौरे पर जाते हैं तो उनके साथ वह युवती जाती है जिसे पीआरओ की पोस्ट दी गई है लेकिन जब राज्यपाल अपने घर चेन्नई जाते हैं तो वह नहीं जाती। इस दौरान वह कहीं और छुट्टियां मनाती है। चिट्ठी में बताया गया कि कथित पीआरओ के लिए कोई ऑफिस तय नहीं है ऐसे में वह अपने बेडरूम से ही काम करती है जो कि राज्यपाल के बेडरूम से जुड़ा हुआ है और अधिकतर सोशल मीडिया पर सक्रिय रहती है।

8. एक ही रूम में रुकते थे राज्यपाल और उनकी पीए
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि जब राज्यपाल मणिपुर के इंचार्ज थे और इंफाल दौरे पर जाते थे तो उनकी निजी सहायक जिसे PRO बनाया गया था उनके साथ ही रहती थी और वे एक ही रूम शेयर करते थे। राज्यपाल के महिलाओं के साथ अवैध संबंधों के बारे में शिलॉन्ग और इंफाल राजभवन के अलावा, नई दिल्ली और कोलकाता में स्थित मेघालय भवन के कर्मचारियों से पूछताछ करके सच्चाई जानी जा सकती है। हैरानी की बात यह भी रही कि 7 नवंबर 2016 को पीआरओ पोस्ट के लिए सिर्फ 10 महिलाएं को ही इंटरव्यू में बुलाया गया। जब इंटरव्यू के लिए आई महिलाओं ने सवाल उठाए तो सिर्फ फॉर्मलिटी के लिए अगले दिन पांच पुरुषों को भी इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। उनमें से सिर्फ दो को अगले राउंड के लिए सेलेक्ट किया गया ताकि सवाल न उठें।












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